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हिन्दुओं के लिए सीएम योगी ने लिया बेहद शानदार फैसला, विदेशो से भी आ रही है बधाइयाँ

लखनऊ : हाल ही में योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक शानदार फैसले लिए जैसे कि महापुरुषों के नाम पर छुट्टियां रद्द करके, बच्चों को महापुरषों के जीवन से अवगत कराना. बच्चों के कन्धों से भारी भरकम बस्तों का बोझ कम करने के लिए शनिवार के दिन को “नो स्कूल बैग डे” घोषित करना. सभी स्कूलों में जमीन पर या टाट पट्टी पर बैठने की व्यवस्था को बंद करके , मेज कुर्सी को शुरू करना हो. इसी सिलसिले में बच्चों के लिए योगी सरकार ने अब एक और शानदार फैसला लिया है जो आज तक किसी और सरकार ने लेने के बारे में सोचा भी नहीं होगा.


कक्षा तीन से सभी स्कूल में संस्कृत भी पढ़ाई जाएगी

सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग में प्रदेश में संस्कृत, हिंदी भाषा व शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए सभी प्राइमरी स्कूलों में कक्षा तीन से संस्कृत पढ़ाये जाने का प्रस्ताव पास किया जा चुका है. इस पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव भेज दिया गया है. सरकार का मानना है कि शुरू से बच्चों के संस्कृत पढ़ने से बच्चो का इसके प्रति लगाव बढ़ेगा. इससे पहले योगी सरकार ने सभी स्कूलों में नियमित योग कराने का भी प्रस्ताव पेश किया था.

गुरुकुल का अस्तित्व खतरे में है

प्रदेश में अभी भी कुछ ऐसे गुरुकुल हैं जो संस्कृत शिक्षा पद्धति से चल रहे हैं किन्तु पूर्व की सभी सरकारों ने हमेशा ही उनकी उपेक्षा करी है. जिससे सरकारी योजनाओ से गुरुकुल को कोसो दूर रखा जाता रहा है. गुरुकुल में पहले छह शिक्षक थे किन्तु अब सिर्फ एक शिक्षक हैं जिन्हे अकेले 200 बच्चों को पढ़ना पड़ता है. हालाँकि गुरुकुल के संस्थापक स्वामी देवेंद्रा नन्द गिरि ने योगी सरकार के इस फैसले की जमकर तारीफ करी है, उन्हें अब केवल योगी सरकार से ही उम्मीदें है. इससे पहले सभी सरकारों की तुष्टिकरण की राजनीती के कारण संस्कृत भाषा की हमेशा उपेक्षा होती रही. जिसके कारण छात्रों ने भी संस्कृत की तरफ से मुँह मोड़ना शुरू कर दिया था.


मठ के सन्यासी सवांर रहे छात्रों का भविष्य

शिक्षा व्यवस्था बिगड़ते देख कर मठ के सन्यासियों ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया है. शिक्षकों की भारी कमी होने के कारण गुरुकुल के सन्यासियों ने बच्चो को वेदों, शास्त्रों, उपनिषदों, व कर्मकांड़ों का बोध कराना शुरू किया है. डलमऊ बड़ा मठ में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र सुबह 4 बजे गंगा स्नान कर देववाणी में मंत्रों का उचारण करते हैं. शिक्षा के साथ-साथ वेदों, उपनिषदों ,गीता, कर्मकांडों, का बोध कराया जाता है. इन गुरुकुल में शिक्षा लेने के लिए सिर्फ देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बच्चे आते हैं.

मठ के छात्र सूरज मिश्र ने योगी सरकार के सभी स्कूलों में संस्कृत पढ़ाने के प्रस्ताव पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा है कि पिछली सभी सरकारों का संस्कृत की उपेक्षा करने से छात्र दुखी थे. संस्कृत विद्यार्थियों के हित के लिए अधिकारियों को बहुत पहले से कदम उठाने चाहिए क्योंकि संस्कृत भाषा वेद पुराणों की जननी है.


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