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लाखों लोगों की मांग मानते हुए योगी ने किया सबसे बड़ा ऐलान, देश में आज तक नहीं हुआ था ऐसा

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लखनऊ : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए बेहद सख्त हो चुके हैं. योगी के निर्देशों के बाद शि‍क्षा विभाग भी अब हरकत में आ गया है और निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी गयी है. लखनऊ के जिला स्कूल निरीक्षक ने निजी स्कूलों की लूट को रोकने के लिए कार्यवाही करनी शुरू कर दी है.

अभिभावक करा सकते हैं एफआईआर !

लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश त्रिपाठी ने कहा कि अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लगाई जायेगी. प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ सख्त नियम बनाये गए हैं. योगी सरकार के नए नियम के मुताबिक़ अब मनमानी फीस वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ अभिभावक एफआईआर करवा सकते हैं.

इसके अलावा अबसे हर अभिभावक को स्कूल की पूरी जानकारी लेने का पूरा-पूरा अधिकार होगा. अभिभावकों के पूछने पर स्कूलों को पढ़ने वाले बच्चों की संख्या से लेकर अध्यापकों की तनख्वाह तक सारी जानकारी देनी होगी. अब वो कोई भी जानकारी अभिभावकों से छुपा नहीं सकते और पूछने पर मना नहीं कर सकते.

किताब-कॉपियों, यूनिफार्म के नाम पर लूट बंद !

जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश त्रिपाठी ने कल दो निजी स्कूलों में चल रही किताबों की दुकानें सील कर दी. यहां से स्कूल मनमाने दामों पर स्कूल की किताबें बेच रहे थे और अभिभावकों को जबरदस्ती स्कूल से किताबें खरीदने के लिए विवश कर रहे थे.

इसके साथ-साथ कई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें किसी तय दुकान से खरीदने के लिए कहते थे और वहां से मोटा कमीशन वसूलते थे, अब इसपर भी रोक लगेगी. स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही चलेंगी और अभिभावक अपनी मर्जी से जहां से चाहें वहां से किताबें खरीद सकते हैं.

कई प्राइवेट स्कूल एसी चार्ज, मैगजीन चार्ज और बिल्डिंग चार्ज के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे, अब इस पर भी रोक लगा दी गयी है. जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश त्रिपाठी के मुताबिक़ ये सभी चार्ज अब अवैध होंगे क्योंकि स्कूल भवन, एसी इत्यादि तो उसकी निजी संम्पत्ति है और इसके नाम पर छात्रों के माता-पिता से उगाही नहीं की जा सकती.

स्कूल परिसर है, कोई बैंक्वेट हॉल नहीं !

शि‍क्षा विभाग के मुताबिक़ प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों का फीस तय करने का मानक तय किया जाएगा. शिक्षकों की तनख्वाह, स्कूल का मेन्टेनेंस के पैसे और स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर फीस तय की जायेगी. मनमाने तरीके से फीस अब नहीं वसूली जायेगी.

स्कूल का इस्तमाल कॉमश‍िर्यल एक्टिविटी के लिए नहीं किया जा सकता. यानि स्कूल केवल पढ़ाएंगे, किताबें, कॉपी, स्कूल यूनिफार्म इत्यादि नहीं बेच सकते. इसके अलावा स्कूल परिसर को शादी-विवाह इत्यादि के उत्सवों के लिए भी इस्त्माला नहीं किया जा सकता. शिक्षा के मंदिर को ये सब शोभा नहीं देता. शिक्षा का व्यापारीकरण अब बंद.

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