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सुन्नी व् शिया वक्फ बोर्ड में बड़े पैमाने पर घपले का भंडाफोड़, योगी सरकार ने शुरू की जांच !

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लखनऊ : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचारियों को बक्शने के मूड में बिलकुल दिखाई नहीं दे रहे हैं. पिछली सरकारों के दौरान खुल्लम-खुल्ला धड़ल्ले से हुए घोटालों को उजागर करते हुए जांच की जानी शुरू हो चुकी है. इस कड़ी में अब एक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिससे यूपी के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में हड़कंप मच गया है.

जिन लोगों पर थी वक्फ की जिम्मेदारी, उन्होंने ही कर दिया सौदा !

दरअसल योगी सरकार के वक्फ मामलों के मंत्री मोहसिन रज़ा ने पूर्व अखिलेश सरकार की ओर इशारा करते हुए यूपी के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में करोड़ों की गड़बड़ी को उजागर किया है. सबसे बड़ा घपला तो वक्फ की संपत्ति पर कब्जे को लेकर सामने आया है.

वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है “दान”, यानी वक्फ की संपत्ति दान में मिली संपत्ति होती है. नियमानुसार दान में मिली वक्फ की संपत्ति को गरीबों की सेवा करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन ख़बरों के मुताबिक़ जिन लोगों पर जनकल्याण के लिए इसके उचित इस्तमाल की जिम्मेदारी थी, उन्हीं लोगों ने दान से मिली संपत्ति का निजी स्वार्थ के लिए सौदा कर डाला.

पैसे कमाने के लिए दीन-ईमान तक की परवाह नहीं की !

वक्फ की संपत्ति को बेचने वालों ने बरेली में तो सभी हदें ही पार कर दीं. आरोपियों ने कब्रिस्तान तक की बोली लगवा डाली. राजनीतिक पहुंच का इस्तमाल करके इन लोगों ने कब्रिस्तान से लेकर वक्फ बोर्ड के बाग़ों तक को बेच डाला. करोड़ों के मुनाफे के सामने किसी ने सही-गलत की फिक्र नहीं की और जमकर धांधलेबाजी की.

बरेली के अलावा मेरठ में भी इसी तरह से वक्फ बोर्ड की जमीन बेचने के मामलों का पर्दाफ़ाश हुआ है. मेरठ
के कंकरखेड़ा इलाके में वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों ने करोड़ों की जमीन बेच डाली. इस मामले की शिकायत उस परिवार ने की है, जिसके पुरखों ने इस जमीन को समाज की भलाई के लिए दान किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वक्फ बोर्ड में बैठे कलयुगी लुटेरे उनके पुरखों द्वारा दान की गयी जमीन को निजी स्वार्थ के लिए बेच खाएंगे.

फाइलों को ठिकाने लगाने की कोशिश !

13 लोगों पर वक्फ की जमीन बेचने के आरोप लगे हैं, जिनमे शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी का नाम भी शामिल है. मोहसिन रज़ा अचानक सुन्नी वक्फ बोर्ड के दफ्तर आ धमके और बोर्ड का जायजा लेने लगे. जायजा लेना अभी उन्होंने शुरू ही किया था कि दफ्तर के कैंपस में खड़ी एक पुरानी कार को देखकर चौंक गए.

वहां उन्होंने जो नजारा देखा उसे देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गयी. सुन्नी वक्फ बोर्ड के दफ्तर के कैंपस में खड़ी इस पुरानी कार के भीतर अधजली फाइलों का अंबार लगा हुआ था. घपले छुपाने के लिए फाइलों को जला दिया गया था और अधजली फाइलों को ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही थी. बहरहाल अब जब मामले खुल चुके हैं, तो इनकी जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं और दोषियों को सख्त सजा दीं जायेगी.

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