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केजरीवाल रिश्वतकांड में फसे हैं, वहां योगी ने ले लिया बेहद ऐतिहासिक फैसला, यूपी में ख़ुशी की लहर

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लखनऊ : बाकी भारत में जो हो रहा है, सो हो रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में तो सब बढ़िया हो रहा है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ऐसा तो खुद उत्तर प्रदेश की जनता ही कह रही है. योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही ऐसे-ऐसे क्रांतिकारी फैसले लिए हैं कि प्रदेश की जनता ख़ुशी से फूली नहीं समा रही है. अभी-अभी तो एक ऐसी जबरदस्त खबर सामने आ रही है, जिसे देख देशभर की जनता योगी के सुशासन का गुणगान कर रही है.

हर दिन एक छात्र की मां चेक करेगी मिड-डे मील

दरअसल आये दिन सरकारी स्कूलों में खराब मिड-डे मील परोसे जाने की ख़बरें आती रहती हैं. सरकार ने मिड-डे मील की गुणवत्ता को जांचने के लिए टीम भी बनायी थी लेकिन स्थिति जस की तस ही रही. बच्चों के अभिभावकों के मुताबिक़ सरकारी अधिकारी अपना का सही तरीके से करते ही नहीं, इसके चलते खराब खाने से उनके बच्चों की जान खतरे में पड़ जाती है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए योगी सरकार ने बेहद अहम फैसला लिया है.

इस फैसले के मुताबिक़ अब मिड-डे मील को चेक करने बच्चों की मां जाएंगी. अगर माताएं कहेंगी कि खाना ठीक है, तभी बच्चों को खिलाया जाएगा क्योंकि माँ तो सब जानती हैं और वो अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कभी खिलवाड़ नहीं करेंगी. ख़बरों के मुताबिक़ यूपी सरकार ने अब स्कूलों के मिड-डे मील में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता को जांचने के लिए छात्रों की माताओं की टीम बनाने के निर्देश जारी किये हैं.

मां को ठीक लगा तभी बच्चों को परोसा जाएगा खाना

इस फैसले के तहत हर हफ्ते 6 छात्रों की माताओं की एक टीम स्कूल में बनने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच करेंगी. योगी सरकार का मानना है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के भरोसे बच्चों के भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती, ऐसे में लापरवाही और कामचोरी हो सकती है लेकिन बच्चों की माताएं अपने बच्चों को लेकर कभी कोताही नहीं बरत सकती.


बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जन-सहभागिता जरुरी है. जन सहभागिता की नीति के तहत प्रत्येक स्कूल में 6 छात्रों की माताओं की एक टीम बनाई जाएगी और इस टीम में शामिल हर मां के लिए सफ्ताह में एक दिन तय होगा. इस दिन माँ खुद स्कूल जाएंगी और बच्चों को परोसे जाने वाले खाने को चख के उसकी गुणवत्ता की जांच करेंगी.

मां को ठीक लगा तभी उस खाने को बच्चों को परोसा जाएगा, इससे बासी या कच्चा या खराब गुणवत्ता का खाना बच्चों को नहीं मिलेगा क्योंकि माँ चखके तुरंत पहचान लेंगी. खाने को लेकर माँ की रिपोर्ट में किसी भी तरह की शिकायत आने पर तत्काल उस कमी को दूर किया जाएगा. यदि माताओं की रिपोर्ट में बार-बार एक ही शिकायत आएगी तो संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

योगी सरकार के फैसले के मुताबिक़ मिड-डे मील चेक करने वाली टीम में केवल वही माताएं शामिल हो सकेंगी, जिनके खुद के बच्चे उस स्कूल में पढ़ते हैं. योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने इस सिलसिले में माताओं की टीम को 20 मई तक बना लिए जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं. इसी के साथ ये भी फैसला लिया गया है कि इस टीम में समाज के सभी वर्ग की महिलाओं को शामिल किया जाए.

ऐसे ऐतिहासिक फैसले को देख उत्तर प्रदेश कि जनता गदगद है, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि इतना बेहतरीन आइडिया इससे पिछली सरकारों के दिमाग में क्यों नहीं आया. वहीँ ऐसा करने से बच्चों के परिवार भी संतुष्ट रहेंगे क्योंकि बच्चों के खाने का ख्याल उसकी माँ से बढ़कर और कौन रख सकता.


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