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आप मुंबई इंडियंस की जीत का जश्न मना रहे हैं, वहां योगी ने ले लिया हाहाकारी फैसला, रच दिया इतिहास

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लखनऊ : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे पहले सीएम बन गए हैं, जो सही मायनो में धर्म निरपेक्ष यानी सेक्युलर हैं, ऐसा हम नहीं बल्कि यूपी की ही जनता कह रही है. किसी की भी तुष्टिकरण ना करना और सबको सामान भाव से देखते हुए तरक्की के सामान अवसर देना ही सही मायनो में सेकुलरिज्म कहलाता है. सीएम योगी ने इसी बात को ध्यान में रखकर ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसे देख प्रदेश की जनता वाह-वाह कर रही है.


रद्द होगा अल्पसंख्यक कोटा !

दरअसल मुस्लिम और यादवों के समीकरणों से सत्ता में आयी अखिलेश सरकार ने आते ही तुष्टिकरण शुरू कर दिया था. सबको सामान विकास देने के बजाय पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2012 में यूपी सरकार की योजनाओं में भी अल्पसंख्यकों को कोटा देने की शुरुआत कर दी थी. यानी शिक्षा व् सरकारी नौकरियों के बाद यूपी में सरकार की योजनाएं भी धर्म के आधार पर दी जाने लगी थी.

अखिलेश सरकार ने 85 सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों के लिए 20 फीसदी कोटा निर्धारित किया था, लेकिन सीएम योगी ने सरकार की योजनाओं में चल रहे अल्पसंख्यक कोटा को ख़त्म करने का फैसला ले लिया है. इसके लिए योगी सरकार की कैबिनेट जल्द ही प्रस्ताव लाने जा रही है. बताया जा रहा है कि योगी सरकार ने इसकी पूरी तैयारी भी कर ली है.

85 योजनाओं पर दिया जा रह था कोटा

2012 में चुनाव जीतकर जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने 85 सरकारी योजनाओं पर अल्पसंख्यकों के लिए 20 फीसदी कोटा निर्धारित कर दिया था. इनमें कृषि, गन्ना विकास, लघु सिंचाई, उद्यान, पशुपालन, कषि विपणन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, लोक निर्माण, सिंचाई, ऊर्जा, लघु उद्योग, खादी ग्रामोद्योग, रेशम विकास, पर्यटन, बेसिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, युवा कल्याण, नगर विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, पिछड़ा वर्ग कल्याण, व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण, दुग्ध विकास, समग्र ग्राम विकास में कोटा का लाभ अल्पसंख्यकों को मिल रहा था.


योगी सरकार के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने इस कोटे को खत्म करने की सहमति दे दी है. उन्होंने कहा है कि सरकारी योजनाओं में कोटा देना उचित नहीं है. योगी सरकार इसे ख़त्म करने के पक्ष में है. सरकारी योजनाओं से बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों का विकास होना चाहिए. इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने ले जाया जाएगा.

और भी योजनाएं कर चुके हैं खत्म

दरअसल ये अखिलेश सरकार की पहली योजना नहीं है, जिसपर सीएम योगी कैंची चलाने जा रहे हों. अंधेर नगरी के चौपट राजा की तरह अखिलेश ने यूपी में कई ऐसी बे सिरपैर की योजनाएं शुरू की हुई थी, जिन्हे धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है या फिर उनमे बदलाव लाये जा रहे हैं.

उदाहरण के तौर पर अखिलेश यादव ने गरीबों के लिए जो राशन कार्ड शुर किये, उनमे भी अपनी फोटो लगा ली. ऐसा शायद ही किसी अन्य प्रदेश में किया गया हो. योगी सरकार ने इसे बंद करा दिया है. इसके अलावा समाजवादी पेंशन योजना पर रोक के साथ पोषण मिशन कमेटी भी रद्द कर दी गई है. इसके अलावा जिन-जिन सरकारी योजनाओं में समाजवादी शब्द घुसाया गया था, उसे भी हटा दिया गया है. समाजवादी शब्द की जगह मुख्यमंत्री लिखा गया है.


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