Home > ख़बरें > हिंदुओं की आस्था के लिए हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, वामपंथियों, कांग्रेसियों में तहलका

हिंदुओं की आस्था के लिए हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, वामपंथियों, कांग्रेसियों में तहलका

ganga-living-entity

नई दिल्ली : धार्मिक प्रतीकों व् स्थलों के ऊपर इस देश में काफी राजनीति होती आयी है. चाहे वो अयोध्या के राम मंदिर का मामला हो, सेतु समुद्रम का मामला हो या फिर गंगा-यमुना नदियों का मामला हो. देश की नदियों का पानी दिन पर दिन प्रदूषित होता चला जा रहा है, लेकिन अब नैनीताल हाई कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसकी चर्चा दुनियाभर में की जानी शुरू हो गयी है.

गंगा को मिली जीवित मनुष्य की संज्ञा !

हाई कोर्ट के इस फैसले के तहत अब गंगा और यमुना नदी को जीवित मान लिया गया है. देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, हालांकि हिन्दू धर्म में तो सभी नदियों को माँ का दर्जा दिया गया है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी उच्च अदालत ने कानूनी तौर पर ऐसा फैसला सुनाया हो.

हरिद्वार निवासी मो. सलीम ने 2014 में एक जनहित याचिका दायर की थी, उसी की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह फैसला सुनाया. वरिष्ठ न्यायाधीश संजीव शर्मा और न्यायमूर्ति अलोक सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को हाईकोर्ट की असाधारण शक्तियों का इस्तमाल करते हुए फैसला सुनाया कि यदि राज्य सरकार गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल नहीं बना पाती तो केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 365 के तहत राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारियां निभाने में असफल होने की स्थिति में भंग करने का अधिकार रखती है.

अतिक्रमण हटाने के आदेश !

ये फैसला सुनाने के साथ ही हाईकोर्ट ने देहरादून के डीएम को आदेश दिए कि 72 घंटे के अंदर-अंदर ढकरानी की शक्ति नहर से अतिक्रमण हटाया जाए. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि 8 हफ्ते में केंद्र सरकार गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाये. हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह के विवाद को मुख्य सचिव, महानिदेशक और महाधिवक्ता अब स्वतंत्र रूप से न्यायालय में लेकर आएं.

हिंदुओं की आस्था का प्रतीक !

इससे पहले न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप पर स्थित वाननुई नदी को भी जीवित मान लिया गया था और इसे भी एक जिंदा व्यक्ति की तरह कानूनी अधिकार दिए गए हैं. हिन्दू मान्यताओं में तो गंगा को माँ और स्वर्ग की एक देवी के रूप में निरुपित किया गया है जो स्वर्ग से धरती पर आयी हैं और भगवान् शिव की जटाओं से निकलती हैं.


गंगा नदी के किनारे वाराणसी और हरिद्वार जैसे कई पवित्र तीर्थस्थल भी बसे हुये हैं. मान्यताओं के अनुसार गंगा नदी को दुनिया की सबसे पवित्र और पावन नदी माना जाता है, यहाँ तक कि हिंदुओं के लिए तो इस नदी को ही मोक्ष का द्वार भी माना जाता है.

इसीलिए देश में कई त्यौहार और उत्सव गंगा से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं जैसे मकर संक्रांति, कुंभ और गंगा दशहरा के दौरान गंगा नदी में स्नान करना या केवल दर्शन ही कर लेना बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है.

वहीँ यमुना नदी को भी भारत की एक बेहद महत्वपूर्ण नदी माना जाता है. देश की सबसे पवित्र और प्राचीन नदियों में गंगा के साथ-साथ यमुना की भी गिनती की जाती है. ब्रज संस्कृति के लिए तो यमुना ही सबसे महत्वपूर्ण नदी है. ब्रज संस्कृति में तो यमुना केवल नदी नहीं बल्कि यहाँ की धार्मिक भावना की मुख्य आधार रही है.

यानी देश के कई धर्मों व् संस्कृतियों में इन नदियों को जीवित देवी का दर्जा दिया गया है, लेकिन अब हाई कोर्ट ने कानूनी रूप से भी इन नदियों को जीवित व्यक्ति का दर्जा दे दिया है. जिसके बाद अब इन नदियों को स्वच्छ रखने में सरकार को बेहद आसानी रहेगी.


इस न्यूज़ को अपने मित्रों के साथ शेयर करना न भूलें। आपकी सुविधा के लिए शेयर बटन्स नीचे दिए गए हैं।

सब्सक्राइब करें हमारा यू-ट्यूब चैनल


हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें


फेसबुक पेज लाइक करें

loading...

Comments