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भारत के साथ आया अमेरिका, ट्रंप ने दिया चीन को ऐसा झटका, जिसे देख पाकिस्तान भी हिल गया

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नई दिल्ली : पीएम मोदी विदेश ज्यादा जाते हैं, ऐसा कहकर छाती पीटने वालों को आज अमेरिका की तरफ से करारा तमाचा पड़ा है. चीन के सामने नतमस्तक होने वाले कोंग्रेसियों और वामपंथियों को आज पीएम मोदी की ताकत का अहसास हुआ है. जो अमेरिका अब तक हुए भारत-पाक युद्धों में पाकिस्तान का समर्थन करता आया था, आज उसी अमेरिका ने भारत को लेकर बड़ा फैसला किया है.


चीन-पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका आया भारत के साथ

अमेरिका ने चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर भारत को सपोर्ट किया है. डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि ये कॉरिडोर विवादित इलाके से गुजरेगा और किसी भी देश को बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के जरिए अपनी बात नहीं मनवाना चाहिए.

आपको बता दें कि ये कॉरिडोर पाक के ग्वादर से चीन के शिनजियांग तक जाएगा. ये पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरेगा, जिस पर भारत का हक़ है लेकिन कांग्रेस की मक्कारी और कायरता के चलते इस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था. भारत संप्रभुता के मुद्दे पर हमेशा से इस कॉरिडोर का विरोध जताता रहा है.

चीन के खिलाफ मोदी के दोस्त ट्रंप

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने चीन के वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट पर कड़ा एतराज जताया है और भारत को सपोर्ट करते हुए कहा है कि अब हम एक ग्लोब्लाइज़ड वर्ल्ड में रहते हैं जहां पर कई तरह की रोड और बेल्ट हैं. किसी भी देश को वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) को लेकर अपना हक नहीं जताना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वन बेल्ट-वन रोड विवादित इलाके से होकर भी गुजरेगा. उन्होंने चीन को लताड़ते हुए कहा कि उनके मुताबिक़ चीन इसके जरिए तानाशाही करने की कोशिश कर रहा है, इससे खतरा हो सकता है.


दरअसल मैटिस से सीनेटर चार्ल्स पीटर्स ने चाइना पॉलिसी और OBOR को लेकर सवाल पूछा था. पीटर्स ने पूछा था कि OBOR स्ट्रैटजी के जरिए क्या चीन महाद्वीप और समुद्र के नेचुरल रिसोर्स पर कब्जा करना चाहता है?

पाकिस्तान को कब्जाने के लिए चीन की शैतानी सोच

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन से पाकिस्तान के बीच 60 बिलियन डॉलर की लागत से बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की कुल लंबाई करीब 3000 किलोमीटर है. ये पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से चीन के शिनझियांग को जोड़ेगा.

यह कॉरिडोर ग्वादर से शुरू होकर काशगर तक जाएगा. अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान एंट्री गेट का काम करेगा. चीन इस क्षेत्र में औद्योगिक पार्क, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, रेलवे लाइन और सड़कें बना रहा है. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में काराकोरम हाईवे का विस्तार चीन के अशांत रहने वाले शिंजिआंग सूबे तक किया जाएगा. चीन का कहना है कि इससे घाटी तक उसे मुक्त और ट्रेन से तेज रफ्तार पहुंच मिलेगी.

गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कुछ प्रांतों तक रेलवे लाइन व सड़कों का काम पूरा हो जाने पर, ग्वादर, पासनी और ओरमारा में चीन निर्मित नौसेना बेस के रास्ते आने वाले चीनी कार्गो को पाकिस्तान पहुंचने में सिर्फ 48 घंटे लगेंगे. अभी इसमें 16 से 25 दिन का समय लगता है.


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