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2050 तक भारत में होंगे दुनिया में सबसे ज्यादा मुसलमान, इस्‍लाम होगा सबसे बड़ा धर्म

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नई दिल्ली : दुनियाभर में मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. भारत दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देशों में फिलहाल दूसरे नंबर पर है. जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल इंडोनेशिया में मुसलमानों की आबादी सबसे अधिक है, लेकिन अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट ने बेहद ही हैरान करने वाले दावे किये हैं जिसकी चर्चा भारतीय मीडिया में की जा रही है.

2050 तक भारत बन जाएगा सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश

अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ साल 2050 तक भारत दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश बन जाएगा. प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ साल 2050 तक भारत में मुसलामानों की आबादी करीब 30 करोड़ हो जायेगी जो इंडोनेशिया की मुस्लिम आबादी से भी ज्यादा हो जायेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ फिलहाल दुनिया भर में सबसे ज्यादा आबादी ईसाई धर्म मानने वालो की है और इस्लाम धर्म मानने वालों की आबादी ईसाई के बाद दूसरे नंबर पर है. लेकिन फिलहाल बहुत तेजी से इनकी आबादी बढ़ रही है और यदि ये गति इसी तरह से बनी रहती है तो इस शताब्दी के अंत तक मुसलमानों की आबादी ईसाई से भी आगे निकल जायेगी.

प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ साल 2010 में दुनिया में मुसलमानों की आबादी 1.6 बिलियन थी यानि पूरी दुनिया की कुल आबादी का 23 फीसदी मुसलमान थे. इस शताब्दी के अंत होते-होते तक ईसाइयों की आबादी 35 फीसदी बढ़ेगी लेकिन मुसलमानों की आबादी 73 फीसदी बढ़ चुकी होगी और 2050 तक दुनिया में मुसलामानों की कुल आबादी 2.8 बिलियन हो जाएगी.

अमेरिका और यूरोप मे भी बढ़ेंगे मुसलमान

केवल भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप में भी मुसलामानों की आबादी तेजी से बढ़ेगी. फिलहाल अमेरिका में मुसलामानों की आबादी वहाँ की कुल आबादी की 1 प्रतिशत है. लेकिन 2050 तक प्रतिशत बढ़कर 2.1 हो जाएगा. मुस्लिम देशों से अन्य देशों में इमीग्रेशन के कारण यूरोप में भी मुसलामानों की आबादी में इजाफा होगा.

आबादी़ बढ़ने के कारण

प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया में मुसलमानों की आबादी़ बढ़ने के पीछे दो मुख्य वजह हैं. पहली वजह तो ये बतायी गयी है कि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर गैर-मुसलमानों से अधिक है. वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो मुस्लिम महिला के औसतन 3.1 बच्चे होते हैं जबकि बाकी धर्मों का ये औसत 2.3 है.

दूसरी वजह मुसलामानों की युवा आबादी को बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2010 में मुसलमानों की औसत आयु 23 वर्ष थी जबकि गैर-मुसलमानों की औसत आयु 30 वर्ष थी. सबसे ज्यादा युवा आबादी होने की वजह से मुसलमानों की बड़ी आबादी या तो फिलहाल बच्चे पैदा कर रही है या भविष्य में करेगी.

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