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गुजरात में दलितों ने खिलाया कमल, कांग्रेस को दी जोरदार पटखनी, जीत गयी बीजेपी

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आपको याद ही होगा कि बिहार चुनाव से ठीक पहले प्रेस्टिट्यूट मीडिया ने एक खबर को लेकर पीएम मोदी और हिन्दू संगठनों के ऊपर जम के कीचड उछाला था. जिसके बाद पीएम मोदी को मीडिया में आ कर कहना पड़ा था कि गौ-रक्षकों के नाम पर कुछ गुंडे आतंक फैला रहे हैं. और बाद में जांच में पता चला था कि इस घटना के पीछे कांग्रेसियों का हाथ था.

गांव के दलितों ने बीजेपी को चुना

लोगों के मूर्ख समझने वाली कांग्रेस को अपनी उस करतूत के लिए मुह की खानी पड़ी है. गुजरात के ऊना में गोरक्षकों के नाम पर एक दलित परिवार को बुरी तरह पिटवाने का आरोपी सरपंच प्रफुल्ल कोराट चुनाव में बुरी तरह हार गया है। गांव के लोगों ने बीजेपी के समर्थन पर चुनाव में खड़े धनजी भाई कोराट को गाँव का नया सरपंच चुना है।

मोटा समधियाला गांव में पाटीदारों की संख्या अधिक है। गांव में कुल 8 वार्ड में से 6 में बीजेपी के उम्मीदवारों को बड़ी जीत हासिल हुई है। बीजेपी को सबसे ज्यादा समर्थन तो उस वार्ड में मिला है जिसमे दलितों की संख्या सबसे ज्यादा है। यहां से बीजेपी के रमेश सरवैया उम्मीदवार थे। रमेश सरवैया भी उसी दलित परिवार के सदस्य हैं, जिनकी गोरक्षा के नाम पर बुरी तरह से पिटाई की गयी थी.

क्या हुआ था?

पिछले साल जुलाई ठीक बिहार चुनाव से पहले गुजरात के ऊना जिले के मोटा समधियाला में गोरक्षकों के नाम पर कुछ गुंडों ने गांव के ही एक दलित परिवार के 4-5 सदस्यों की रस्सी से बांधकर बुरी तरह से पिटाई की थी। इस घटना का बाकायदा विडियो बनाया गया और फिर इसे सोशल मीडिया में वायरल किया गया. बस फिर क्या था, एकाएक दलितों के नाम पर दुकान चलाने वाले नेता प्रकट हो गए और प्रेस्टिट्यूट मीडिया के साथ मिलकर इस मामले पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया था।

सभी ने मिलकर इस मुद्दे द्वारा पीएम मोदी को घेरने की कोशिश की, मकसद ये था कि देश भर के दलितों में ये डर फैलाया जाए कि बीजेपी के राज्यों में दलितों पर बहुत अत्याचार हो रहे हैं. ताकि बिहार में मोदी लहर को रोका जा सके. मगर वहां के लोगों को शक था कि ये सब कांग्रेस ने ही करवाया था क्योंकि गुजरात का ऊना जिला तो कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. जांच में यह बात सामने आ भी गयी कि पिटाई के पीछे गांव के सरपंच का ही हाथ था। माना जाता है कि इस सरपंच के ऊना से कांग्रेसी विधायक के साथ करीबी सम्बन्ध हैं.

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