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कश्मीर से आयी ये सनसनीखेज खबर पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी, यकीन नहीं कर पाएंगे

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श्रीनगर : पाकिस्तान के इशारों पर देश के कुछ तत्व कश्मीर को देश से तोड़ने का ख्वाब देखते हैं. इस तरह के लोग कश्मीर में अलगाववाद की भावना फैलाते हैं और सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करने के लिए उकसाते नज़र आते हैं. अब कश्मीर से एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर सामने आयी है जिसपर विश्वास करना भी बेहद मुश्किल है.


गिलानी के पोते को सरकारी नौकरी !

खबर है कि कश्मीर में देश विरोधी आवाज बुलंद करने वाले अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोते को महबूबा मुफ़्ती सरकार द्वारा नियमों को दरकिनार करके सरकारी नौकरी दे दी गयी है. देश के खिलाफ कश्मीर के मासूम बच्चों और युवाओं को भड़काने वाले सैयद अली शाह गिलानी के पोते पर राज्य की पीडीपी सरकार का प्रेम इस कदर उमड़ा कि उसे सरकारी ‘दामाद’ ही बना दिया.

सूत्रों के हवाले से आयी खबर के मुताबिक़ राज्य सरकार ने बाकायदा नियमों को दरकिनार करके गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग की सहयोगी विंग शेर-ए-कश्मीर इन्टरनैशनल कन्वेक्शन कॉम्प्लेक्स (SKICC) में रिसर्च ऑफिसर बना दिया है.

जनता के टैक्स के पैसों से मोटी तनख्वाह और पेंशन !

बतौर रिसर्च ऑफिसर अनीस को 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष तनख्वाह दी जायेगी और रिटायर होने के बाद जनता के टैक्स के पैसों से पेंशन भी दी जायेगी. उसी जनता के टैक्स के पैसों से जिस जनता को उनके दादा गिलानी अपना मानते भी नहीं. वो तो खुद को भारत का हिस्सा भी नहीं मानते और खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हैं.

सूत्र के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग की मुखिया खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती हैं. नियुक्त प्रक्रिया कहती है कि इस पोर्ट पर नियुक्ति के लिए जम्मू-कश्मीर स्टेट सबऑर्डिनेट सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड या पब्लिक सर्विस कमीशन के पास आवेदन भेजा जाना चाहिए था लेकिन पर्यटन विभाग द्वारा ऐसा नहीं किया गया.


टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की खबर के मुताबिक, पर्यटन सचिव फारूख शाह ने इस मामले पर अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने बताया कि रिसर्च ऑफिसर के पद पर अनीस की नियुक्ति में सभी नियम-प्रक्रियाओं का पालन किया गया है. उन्होंने बताया कि विभाग ने आवेदन आमंत्रित किए थे जिसमें अनीस को इस पद के योग्य पाया गया इसलिए उन्हें ये नौकरी दे दी गयी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार SKICC ने उन्हें बताया कि टूरिजम सेक्रटरी ने काफी पहले ही अनीस को नियुक्त कर दिया था लेकिन विभाग ने अनीस को उस वक़्त ये नौकरी देने का फैसला लिया जब गिलानी ने कश्मीर में बंद, विरोध और हिंसा का आह्वान किया. रिपोर्ट के मुताबिक़ अभी तक अनीस का सीआईडी वैरिफिकेशन भी नहीं हुआ है जिस वजह से उसे तनख्वाह नहीं दी जा रही है. जब तक वैरिफिकेशन पूरा नहीं हो जाता तब तक उसे तनख्वाह नहीं मिल सकेगी.

देश का विरोध भी करना है और फायदा भी उठाना है !

हालांकि इसी पद पर आवेदन करने वाले एक अन्य आवेदक ने बताया कि SKICC ने अक्टूबर 2016 में ही उसका आवेदन स्वीकार कर लिया था लेकिन उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया ही नहीं गया. इस पद पर नियुक्ति के लिए कुल 140 आवेदन आए थे लेकिन कुछ खास लोगों को छोड़कर ज्यादातर आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया ही नहीं गया.

मामला गर्माता देख अब बीजेपी विधायक रवींद्र रैणा ने कहा है कि कानून सबसे ऊपर है और नियम सबके लिए बराबर हैं. अगर किसी ने नियमों का उलंघन किया है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वैसे ये सब देखकर कश्मीर के युवाओं की आँखें जरूर खुल जानी चाहिए कि उन्हें देश के खिलाफ सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करने के लिए भड़काने वाले गिलानी को सरकारी लाभ पाने में गुरेज नहीं. एक ओर तो गिलानी राज्य में स्कूलों को चलने नहीं देते और दूसरी ओर खुद उसके बच्चे सरकारी नौकरी पा रहे हैं.


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