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स्विट्जरलैंड से आयी सबसे बड़ी खुशखबरी से देश में सियासी भूचाल, अब फसेंगी बड़ी मछलियां !

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री बनने के बाद से पीएम मोदी ने लगातार कालाधन रखने वालों के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है. इसी के तहत पिछले साल नोटबंदी जैसा कडा फैसला भी उन्होंने लिया था, जिससे देश में फैले कालेधन पर रोक लगाने में मोदी सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगी थी. अब विदेशों में जमा कालेधन से जुडी एक बड़ी खबर आ रही, जिसके बाद देश की राजनीति में हलचलें बढ़ गयी हैं.


विदेशों में जमा कालेधन पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक !

दरअसल पिछले साल भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये गये थे. खबर आ रही है कि स्विट्जरलैंड ने कालेधन की सूचना के अदान- प्रदान करने के लिए हामी भर दी है. एक समझौते के तहत अगले साल से स्विट्जरलैंड अपने देश के बैंकों में जमा कालेधन की सूचना अन्य देशों को देने की स्वचालित व्यवस्था के लिए तैयार है. भारत भी इस समझौते में शामिल हैं.

यानी 2018 से भारत को स्विस बैंकों में जमा कालेधन की जानकारी खुद-ब-खुद ही मिल जाया करेगी. जिसके कारण विदेशों में कालाधन छुपाने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी. हालांकि इसके लिए स्विट्जरलैंड ने कुछ शर्तें भी रखी है.

कालेधन की सूचना पर कुछ शर्तें भी होंगी लागू !

स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मामलों के विभाग एसआईएफ (SIF) ने बयान दिया है कि घरेलू वित्तीय संस्थाओं ने पहली बार इस साल आंकड़े एकत्रित करना शुरू कर दिया है. हालांकि जिन देशों के साथ इस जानकारी को साझा किया जाएगा उन्हें जानकारी की गोपनीयता बनाये रखनी होगी.

अपने बयान में उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में यदि इसकी गोपनियता को भंग किया गया तो वो सूचना देने के काम को निलंबित कर सकते हैं. 2018 से सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू हो जाएगा. एसआईएफ के मुताबिक़ जानकारियां साझा करने से पहले ये सुनिश्चित किया जाएगा कि ये सूचनाएं गलत हाथों में ना पड़ें या फिर उनका दुरूपयोग ना हो.


विभाग की और से कहा गया कि स्विट्जरलैंड गोपनीयता की शर्तों को पूरा करने वाले सभी देशों और क्षेत्रों के साथ टैक्स-संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार है. सांझा की गयी सूचनाओं की गोपनीयता और सुरक्षा महत्वपूर्ण बात है.

स्वचालित तरीके से सूचनाओं का आदान-प्रदान !

कालेधन पर नकेल कसने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तहत स्विट्जरलैंड ने 1 जनवरी 2017 से सूचनाओं के स्वचालित तरीके से आदान-प्रदान के नियमों को प्रभावी बना दिया है. इन नियमों के तहत अगले साल यानी 2018 से कुछ देशों के साथ सूचनाओं का पहला आदान-प्रदान शुरू किया जाएगा, जिनमें भारत भी शामिल है.

वहीँ भारत ने अपनी और से आंकड़ों की गोपनीयता बनाये रखने का वादा किया है. विदेशों में जमा कालेधन को देश में वापस लाने की पीएम मोदी की मुहिम रंग लाने लगी है. इससे पहले भी खबर आयी थी कि स्विट्जरलैंड के साथ हुए समझौते के कारण स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन 33 फीसदी घटकर अब तक के सबसे निचले स्‍तर 1.2 अरब फ्रैंक (तकरीबन 8,392 करोड़ रुपए) पर आ गया था.

यानी अगले साल से विदेशों में छुपाये गए कालेधन को देश में वापस लाये जाने पर काम शुरू हो जाएगा. जानकारों के मुताबिक़ देश के बाद विदेशों में भी जमा कालेधन के वापस आने से ना केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त फायदा होगा, बल्कि कालेधन कुबेरों को जेल की हवा भी खिलाई जा सकेगी.


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