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स्विस राष्ट्रपति आयी भारत, मोदी संग मिलकर बनाया जबरदस्त प्लान, कांग्रेस समेत सोनिया के उड़े होश


नई दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी की वजह से आज हिंदुस्तान पूरे विश्व में एक बार फिर सिर गर्व से उठा के आँख से आंख मिला के चल रह है. वरना पिछली सरकारों में जितने घोटाले किये गए उनसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी बेज़्ज़ती का सामना करना पड़ रहा था जैसा की आज पाकिस्तान को करना पड़ रहा है. इसके बाद देश के सबसे बड़े मुद्दे कालेधन पर मोदी सरकार को बड़ी सफलता मिल रही है क्यूंकि खुद स्विस की राष्ट्रपति कल भारत आयी हैं.

हिंदुस्तान खुद आयीं स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति

जी हाँ यह भारत के लिए बहुत गर्व की बात है कि आज खुद स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस लिउथर्ड बुधवार से तीन दिवसीय हिंदुस्तान के दौरे पर आयी हैं. डोरिस की इस यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में मजबूती लाने के साथ-साथ कालेधन पर भी बहुत बड़ी कामयाबी मिलेगी. यही नहीं स्विस राष्ट्रपति के साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और स्विट्जरलैंड की बड़ी कंपनियों के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आये है.

पीएम मोदी की फैन बन गयीं स्विस की राष्ट्रपति

आपको बता दें कि बुधवार को ही राष्ट्रपति भवन में डोरिस का स्वागत किया गया. इस दौरान भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे. अपने स्वागत के बाद स्विस राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की तारीफ करी और कहा कि ” मैं पीएम मोदी के सुधारों से बहुत ज़्यादा प्रभावित हूँ. वे एक प्रभावशाली पीएम हैं. और हिंदुस्तान को तेज़ी से प्रगति के पथ पर ले जा रहे हैं.”. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल जून में स्विट्जरलैंड की यात्रा की थी. इस दौरान स्विट्जरलैंड ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता का समर्थन किया था.


कालाधन रखने वालों की खैर नहीं

यही कारण है कि अब स्विट्जरलैंड के बैंकों में कालाधन रखने वालों की मुसीबतें बढ़ने वाली है, क्योंकि उनके खाते की पूरी जानकारी भारत सरकार तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है. इससे पिछली सरकारों में जो नहीं हो सका वो मोदी सरकार ने कर दिखाया है. कभी हमेशा भारत के कानूनों पर स्विट्ज़रलैंड शक करने वाला आज भारत के साथ खड़ा है. साथ ही स्विट्जरलैंड सरकार ने स्वचालित सूचना आदान-प्रदान समझौते के लिए भारत के डाटा सुरक्षा और गोपनीयता के कानून को पर्याप्त बताया है.

काले धन से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को इस साल जून में मंजूरी दी थी. स्विस की राष्ट्रपति के भारत आने पर और उनके मंजूरी के साथ ऐसी उम्मीद है कि 2019 से संदिग्ध खातेधारियों की जानकारी मिलना शुरू हो जाएगी.

फिर भी इससे पहले भी कालेधन के कुबेरों पर मोदी सरकार ने अभी से एक्शन लेना शुरू कर दिया है. अभी हाल ही में 8 खाताधारियों के नाम उजागार कर दिए गए थे. इसके बाद स्विस सरकार ने वहां के बैकों में खाता रखने वाले 5 भारतीयों के नाम भी उजागार किए थे. इन सबके खिलाफ भारत में कर सबंधी जांच चल रही है. इन खाताधारियों को अब अदालती कानूनी प्रक्रिया से लेकर आयकर विभाग की कार्रवाई से भी गुजरना होगा.

कांग्रेस करती रही टाल मटोल

वैसे आपको बता दें इससे पहले पीएम मोदी के कहने पर 638 लोगों ने 3770 करोड़ रुपये का कालाधन उजागार कर दिया है. मोदी सरकार ने इस मामले में SIT के हाथ खोल दिए हैं. लिहाजा अब SIT को सीधे मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है. तो वहीँ पिछली कांग्रेस सरकार जानबूझ कर दोहरे कराधान संधियों का हवाला देकर अपने निजी स्वार्थों के चलते कालाधन वापसी के मुद्दे को जान-बूझकर टालती रही थी.


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