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बड़ी खबर : मोदी के जोरदार खुलासे से हिल गयी लालू की कुर्सी, नितीश भी रह गए हक्के-बक्के !

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने पीएम बनने के सपने के चलते बीजेपी से किनारा कर लिया था. लालू और कांग्रेस के साथ महागठबंधन करके उन्होंने सरकार तो बना ली, लेकिन अब इन्ही दोनों के कारण उन्हें लगभग प्रतिदिन राज्य की जनता के सामने शर्मिन्दा भी होना पड़ रहा है. ताजा खबर आयी है उनके सहयोगी लालू यादव को लेकर, जिसके बाद नितीश की हालत कुछ ऐसी हो गयी है कि ना उगलते ही बन रहा है, ना निगलते ही बन रहा है.

रेलमंत्री रहते हुए घपले कर रहे थे लालू ?

दरअसल बिहार बीजेपी के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव को लेकर एक और तगड़ा खुलासा किया है. सुशील मोदी इन दिनों राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद पर बेनामी संपत्ति अर्जित करने के लगातार आरोप लगा रहे हैं और बड़े-बड़े खुलासे करके लालू के साथ-साथ नितीश की भी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं.

मंगलवार को सुशील मोदी ने खुलासा किया कि जब लालू रेलमंत्री थे, उस दौरान कई कंपनियों ने बेनामी संपत्ति खरीदी और बाद में सुनियोजित तरीके से उन सम्पत्तियों को लालू परिवार के नाम कर दिया गया. पटना में पत्रकारों से बात करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि ओमप्रकाश कत्याल नाम के एक व्यक्ति ने 2006 में लालू प्रसाद यादव के लिए बेनामी संपत्ति खरीदने के लिए ए़. क़े. इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई.

बेनामी संपत्ति अर्जित करने के आरोप !

इसके बाद मार्च, 2007 में इस कंपनी ने 39 लाख रुपये में पटना के पानापुर में 28़.57 डिसमिल और चितकोहरा में 43 डिसमिल जमीन खरीदी. सुशील मोदी ने बताया कि इसके बाद इस कंपनी ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को प्रभुनाथ यादव से बतौर उपहार मिली सलेमपुर डुमरा में जमीन और दो मंजिला पक्का मकान, जिसकी कुल कीमत तकरीबन केवल 14 लाख रुपये थी, उसे 70 लाख रुपये में खरीद ली.

सुशील मोदी ने कहा कि इसी बीच तेजस्वी और तेजप्रताप के लिए और जमीन खरीदने के लिए ओमप्रकाश कत्याल ने कंपनी को 80 लाख रुपये का और उसके भाई अमित कत्याल ने 35 लाख रुपये का कर्ज दिया.

सुशील मोदी ने खुलासा किया कि 2014 में कत्याल परिवार इस कम्पनी से हट गए और लालू परिवार पूरी की पूरी कंपनी का मालिक बन गया. उन्होंने आगे खुलासा करते हुए बताया कि फिलहाल इस कंपनी में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी की है और बाकी बची 15 प्रतिशत हिस्सेदारी उनके सुपुत्र तेजस्वी प्रसाद की है, जबकि लालू खुद अपनी बेटियों रागिनी और चन्दा यादव के साथ कंपनी के निदेशक बने बैठे हैं.

मोहरा भर था कत्याल परिवार ?

यानि सुशील मोदी के मुताबिक़ पूरा का पूरा नाटक लालू यादव के परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए ही रचा गया था और कत्याल परिवार तो बस मोहरा भर था. सुशील मोदी ने प्रश्न उठाया कि, “आखिर ए़. क़े. इंफोसिस्टम कंपनी ने जमीन खरीदने के अलावा कोई अन्य रोजगार क्यों नहीं किया? कत्याल परिवार ने कंपनी को एकमुश्त कर्ज क्यों दिया?”

सुशील मोदी ने सवाल किया कि भूमिहीन प्रभुनाथ ने कैसे मकान और जमीन तेजप्रताप को उपहार में दे दीं? कत्याल परिवार ने केवल 45 महीने में ही उस जमीन को 9 गुना ज्यादा कीमत में क्यों खरीद लिया?

जाहिर सी बात है कि सारा का सारा गोलमाल केवल लालू परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए ही किया गया है, जिसकी जांच की जानी चाहिए. इससे पहले भी सुशील मोदी ने लालू परिवार पर बेनामी संपत्ति खरीदने के आरोप लगाए थे.

हालांकि लालू का कहना है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है लेकिन सुशील मोदी के सवालों के जवाब उन्होंने नहीं दिए. इस पूरे मामले पर नितीश ने चुप्पी बनायी हुई है, लालू पर लग रहे आरोपों से उनकी साख पर बट्टा जो लग रहा है. इतने बड़े खुलासे से अब ये लगभग तय हो चुका है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा घमासान मचेगा. जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो लालू को करोड़ों का झटका लग सकता है.

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