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बीएचयू के वामपंथी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने सिखाया ऐसा सबक, सन्न रह गए कन्हैया, उमर खालिद !

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नई दिल्ली : यूपी चुनाव से ठीक पहले पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए सक्रिय हुए बीएचयू के वामपंथी छात्रों की सुप्रीम कोर्ट ने खटिया खड़ी कर दी है. दरअसल कैंपस में हंगामा और गुंडागर्दी के आरोपों के चलते वामपंथी संगठनों से जुड़े 8 छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया था. विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ ये वामपंथी छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वो तो इन वामपंथियों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा.


जज ने ले लिया टेस्ट !

पिछले गुरुवार को इस केस की सुनवाई की गयी. सुनवाई में पहुंचे छात्रों को लगा कि सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलकर वो केस जीत जाएंगे लेकिन जज साहब शायद ये जानते थे कि इन छात्रों का पढ़ाई-लिखाई से तो कुछ लेना-देना है नहीं बल्कि उलटा ये तो वहां का माहौल खराब करने के सिवाय कुछ करते भी नहीं हैं. बस फिर क्या था, जज साहब ने इन छात्रों से उन्ही विषयों से जुड़े सवाल पूछने शुरू कर दिए, जो ये पढ़ते हैं.

जज साहब के सवालों की बौछार देख सभी वामपंथी छात्र बुरी तरह बौखला गए. केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा ने पहले तो उनसे पूछा कि वो कौन सा विषय पढ़ते हैं. जो राजनीति शास्त्र के छात्र थे, उनसे उन्होंने सवाल पूछा कि ‘राज्य’ के क्या-क्या अवयव होते हैं? सवाल सुनते ही उनकी हालत पतली हो गयी. पढ़ाई-लिखाई कुछ की हो तब ना जवाब दें, लिहाजा लगे एक-दुसरे का मुँह टापने.


इसी तरह दर्शनशास्त्र यानी फिलॉस्फी के छात्र से जज साहब ने द्वैतवाद, अद्वैतवाद और शून्यवाद से जुड़े सवाल पूछ लिए. पढ़ाई-लिखाई की जगह नेतागीरी करने वाले ये छात्र अपने ही विषयों से जुड़े सवालों के जवाब नहीं दे पाए और अदालत में अपनी फजीहत करवा ली. वैसे आपको बता दें कि ये छात्र वही हैं, जिन्हे कुछ ही महीने पहले राजदीप और बरखा जैसे पत्रकारों ने मीडिया में हीरो बना दिया था.

इन लफंडर छात्रों के जरिए बीएचयू जैसे बड़े विश्वविद्यालय की छवि को बदनाम करने की साजिश की गई थी. जस्टिस दीपक मिश्रा ने वकीलों की जगह खुद ही सीधे सवाल पूछने शुरू कर दिए. उन्होंने पूछा, “सच-सच बताओ कि तुम लोगों को क्यों सस्पेंड किया गया है.” छात्र सस्पेंड ही रहेंगे, अदालत ने बस इतनी ही राहत दे दी कि ये छात्र परीक्षा में बैठ सकते हैं. इनके लिए 31 जुलाई तक परीक्षा कराई जाएगी और पेपरों के बीच में 3-3 दिन का अंतर रखा जाएगा. सुनवाई में शामिल तीनों जजों ने खुलकर कहा कि उन्हें वो एक मौका और देना चाहते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें अपना आचरण सुधारना होगा.

पहनावे पर भी लगाई फटकार !

सुनवाई के दौरान कॉलेज में आवारा-गर्दी करने वाले ये वामपंथी छात्र अदालत में जींस और रंग-बिरंगी पैंट पहन कर आ गए थे. जिस पर फटकार लगाते हुए जज ने इन्हे अगली सुनवाई में सफेद शर्ट और बालों में अच्छे से कंघी करके आने के लिए भी कहा. साथ ही इन्हे सख्त निर्देश दिए गए कि विश्वविद्यालय के कायदे-कानूनों को मानें और अपनी हरकतें बंद करें.


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