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तीन तलाक के बाद सुप्रीम कोर्ट का एक और बड़ा फैसला, कश्मीरी अलगाववादियों में पसरा मातम !

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट एक के बाद एक कमा दिखा रहा है. तीन तलाक पर रोक लगाने के बाद एक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसे देख कश्मीरी जिहादियों और अलगाववादियों का रोना छूट गया है. पत्थरबाज भी सडकों से गायब हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर को लेकर भी एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट का एक और जबरदस्त फैसला !

दरअसल पत्थरबाजी की घटनाओं के कारण सुरक्षाबलों की जान को ख़तरा बढ़ रहा है. पत्थरबाज आतंकियों की भागने में सहायता भी करते हैं. ऐसे में सेना के पास तो एक ही चारा बचता है कि वो पत्थरबाजी करने वालों को गोली मार दें. लेकिन ऐसा करने की जगह सरकार ने फैसला लिया था कि पेलेट गन का इस्तमाल किया जाए.

मगर पेलेट गन के खिलाफ भी आवाजें उतनी शुरू हो गयी. जम्मू-कश्मीर बार असोसिएशन के ऐग्जिक्यूटिव मेंबर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि घाटी में सुरक्षाबलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाए. मगर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ये कहते हुए रद्द कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर में हिंसा और संघर्ष थम नहीं जाता तब तक किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती. बातचीत का तो सवाल ही नहीं उठता.

किससे बात करें?

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि बात करके मसले का समाधान निकाला जाना चाहिए. जिसपर चीफ जस्टिस जेएस खेहर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सवालिया अंदाज में कहा, ‘किससे बात करें? हिंसा रुकने से पहले किसी भी तरह की बातचीत नहीं की जा सकती.’


बता दें कि इससे पहले पिछले साल 22 सितंबर को हाईकोर्ट ने भी बार असोसिएशन की पेलेट गनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था. बार असोसिएशन का कहना था कि खुद केंद्र सरकार ने पेलेट गन के इस्तेमाल पर विचार करने के लिए एक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया है.

अब पत्थर फेंक के देखो !

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बार असोसिएशन को फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक जिम्मेदार और सम्मानित संस्था है, आपको मामले के समाधान के लिए कोशिश करनी चाहिए. सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने बार काउंसिल की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग तो जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को ही ‘रहस्यमय’ बता रहे हैं.

रंजीत कुमार ने कहा, ‘ये लोग जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं और उसे रहस्यमय बता रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि बार असोसिएशन को कुछ सुझाव देने चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है. केंद्र सरकार सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है.

बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद सुरक्षाबल अब पेलेट गन का इस्तमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं. पत्थरबाजों की अब खैर नहीं. अलगाववादी तो पहले से ही एनआईए जांच के शिकंजे में हैं. कश्मीर अपने उद्धार की ओर तेजी से बढ़ रहा है.


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