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ब्रेकिंग – दिवाली पर हिंदुओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला? पूरे भारत में गुस्से की लहर

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नई दिल्ली : देश की न्यायव्यवस्था द्वारा लिए जा रहे एक तरफ़ा फैसलों को देख देशभर में गुस्से की लहर दौड़ गयी है. न्यायालय को केवल हिन्दुओं के त्यौहार मनाने से क्या आपत्ति है, ये बात समझ से परे है. हिन्दुओं के त्योहारों से ठीक पहले बेहद रहस्मयी तरीके से देश के कोर्ट एक्शन में आ जाते हैं और प्रकृति की चिंता से लेकर जीव प्रेम तक जाग उठता है. इस बार दिवाली से पहले भी सुप्रीम कोर्ट एक्शन में आ गया है.


दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर नहीं फूटेंगे पटाखे ?

ईद या बकरीद पर मौनव्रत धारण करने वाले सुप्रीम कोर्ट व् अन्य एनजीओ दिवाली के दौरान अपने-अपने बिलों से बाहर निकल आये हैं. हालांकि होली पर पानी की और दिवाली पर वायु प्रदूषण की चिंता करने वाले इन एकतरफा ढोंगियों के मुँह पर तब पट्टी बंधी हुई थी, जब बकरीद के दौरान करोड़ों जीवों का क़त्ल कर दिया गया था और उनका खून साफ़ करने के लिए अरबों लीटर पानी बहाया गया था.

दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखे की बिक्री पर पूरी तरह रोक की मांग वाली पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. ये सुनवाई गुरुवार को होगी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि कोर्ट अपने उस आदेश को वापस ले ले, जिसमें कोर्ट ने शर्तों के साथ दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक हटाई थी.

नए साल को मनाते वक़्त पटाखों पर क्यों नहीं लगाते बैन ?

बता दें कि बढ़ते प्रदूषण के कारण दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखे बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. जिसके बाद पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी और सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने हिन्दुओं पर रहम खाते हुए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक को कुछ शर्तों के साथ हटा दिया था.


सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं. ज्यादा से ज्यादा 500 अस्थाई लाइसेंस ही दिए जा सकेंगे. कोर्ट ने कहा था कि 2016 में दिए गए लाइसेंस में से केवल 50 फीसदी को ही इस बार लाइसेंस दिया जाए.

यही नियम एनसीआर में भी लागू किया जाएगा यानी 2016 में दिए गए लाइसेंस के आधे ही इस बार दिए जाएंगे. इसके अलावा पटाखे बनाने में लिथियम, लेड, पारा, एंटीमोनी व आर्सेनिक का इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया था. साथ ही दिल्ली और एनसीआर में अन्य राज्यों से पटाखे लाए जाने पर भी रोक लगा दी गयी थी.

हिन्दू विरोध ढोंगी आये बाहर

इतनी रोक के बाद भी हिन्दुओं ने संतोष कर लिया था, मगर ये बात ढोंगियों से बर्दाश्त नहीं हुई और कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ एक याचिका दायर कर दी गयी. ये वही ढोंगी हैं, जिन्हे पेट्रोल-डीजल सस्ता चाहिए ताकि सालभर प्रदूषण फैला सकें. जो अपने घरों में 24 घंटे ऐसी चलाते हैं मगर तब इन्हे वातावरण का ख्याल नहीं आता. जल्लीकट्टू पर इनका मन जीवों के लिए दया से भर जाता है मगर बकरीद पर करोड़ों जानवरों के क़त्ल पर इन्हे दया नहीं आती, होली-दिवाली से पहले ये बरसाती मेंढकों की तरह अपने-अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं.


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