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ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले से रह दिया इतिहास, मुस्लिम संगठनों में चीख-पुकार

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी चुनाव से पहले देश की जनता से और खासतौरपर मुस्लिम महिलाओं से वादा किया था कि वो उन्हें तीन तलाक जैसी कुरीति से निजात दिलाएंगे. जिसके बाद मुस्लिम महिलाओं समेत राज्य की जनता ने बीजेपी को प्रचंड बहुमत से जिताया. आज पीएम मोदी ने अपना वो सबसे बड़ा वादा पूरा कर दिखाया है और साबित कर दिया कि वो हवाई वादे नहीं करते.

तीन तलाक ख़त्म !

तीन तलाक मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था और भारत सरकार कोर्ट में लगातार इसे ख़त्म करने की मांग पर अड़ी रही. कई मुस्लिम संगठनों द्वारा कई बार सरकार को रोकने की कोशिश की गयी लेकिन सरकार टस से मस नहीं हुई. मुस्लिम महिलाओं से किया वादा जो पूरा करना था. उनपर हो रहे शोषण को जो रोकना था. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने भी मोदी सरकार के पक्ष में फैसला सुना ही दिया.

तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है. जिसके बाद देशभर में मुस्लिम महिलाओं की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए. मोदी-मोदी के नारों से समा गूँज उठा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए. यानि अब मोदी सरकार जब क़ानून बनाएगी तो सुप्रीम कोर्ट भी इसमें दखल नहीं देगा.

तुष्टिकरण की नहीं राष्ट्रवादी हिन्दू “नरेंद्र मोदी” की सरकार है !

यकीन मानिये, इसे ना केवल मोदी सरकार की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि देश में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पहली बार तुष्टिकरण से ऊपर उठकर एक पीएम ने मुस्लिम महिलाओं के दुखों को समझा और उन्हें दूर किया. वरना शाहबानो प्रकरण तो आप जानते ही होंगे, जिसमे इंदौर की रहने वाली मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 में तलाक दे दिया था. पांच बच्चों की मां 62 वर्षीय शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और पति के खिलाफ गुजारे भत्ते का केस जीत भी लिया.

मगर राजीव गांधी सरकार ने तुष्टिकरण के चलते एक साल के भीतर मुस्लिम महिला (तलाक में संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, (1986) पारित कर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था. बहरहाल अब देश में कांग्रेस सरकार नहीं है, मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वो अब तीन तलाक को ख़त्म करने के लिए क़ानून बनाने जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया. कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे. सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे. वहीं चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर तीन तलाक के पक्ष में थे.

बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को अंसवैधानिक बताते हुए खत्म कर दिया है. सुबह याचिका कर्ता सायरा बानो, पर्सनल लॉ बॉर्ड के वकील कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. इस मुद्दे पर कोर्ट में याचिका दायर करने वालीं सायरा बानो ने फैसला आने से पहले कहा कि मुझे उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला मेरे हक में आएगा. जो भी फैसला होगा, हम उसका स्वागत करेंगे.

तीन तलाक के पक्ष में नहीं केंद्र

बता दें कि 5 जजों की बेंच इस केस में सुनवाई कर रही थी. कोर्ट में यह सुनवाई 6 दिनों तक चली थी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया था, उसमे स्पष्ट किया था कि मोदी सरकार तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को ‘दुखदायी’ प्रथा करार देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में ‘मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए.’

इन पांच जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

1. चीफ जस्टिस जेएस खेहर

2. जस्टिस कुरियन जोसेफ


3. जस्टिस आरएफ नरिमन

4. जस्टिस यूयू ललित

5. जस्टिस अब्दुल नज़ीर

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दलील !

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से कोंग्रेसी नेता कपिल सिब्बल वकील थे. उन्होंने कोर्ट में कहा कि तीन तलाक का पिछले 1400 साल से जारी है. अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं. हालांकि ये दलील बिलकुल गलत है क्योंकि यदि पुराने वक़्त स चली आ रही कुप्रथा को ख़त्म नहीं किया जा सकता तब तो बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुरीतियों को भी बंद नहीं किया जाता.

खत्म होनी चाहिए तीन तलाक की प्रथा

वहीं केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी थी कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो भारत क्यों नहीं कर सकता. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जजों की बेंच से कहा था, ‘अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे. हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे.’

मोदी ने लाल किले से की थी बात

15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि तीन तलाक के कारण कुछ महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही हैं, तीन तलाक से पीड़ित बहनों ने देश में आंदोलन खड़ा किया, मीडिया ने उनकी मदद की. तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली बहनों का मैं अभिनंदन करता हूं, पूरा देश उनकी मदद करेगा. इसी से साबित होता है कि पीएम मोदी इसके लिए कितने गंभीर हैं.

महिला अधिकारों की लड़ाई

तीन तलाक पर केंद्र का कहना था कि यह मामला बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का नहीं है. यह एक धर्म के भीतर महिलाओं के अधिकार की लड़ाई है. इस मामले में विधेयक लाने के लिए केंद्र को जो करना होगा वह करेगा, लेकिन सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा? इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अस्पृश्यता, बाल विवाह या हिंदुत्व के भीतर चल रही अन्य सामाजिक बुराइयों को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकता है. कोर्ट इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता.


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