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राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले से देश में ख़ुशी की लहर, खिले स्वामी और योगी के चेहरे

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नई दिल्ली : 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने देश की जनता से राम मंदिर बनवाने का वादा किया था. और अब योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बन जाने के बाद से इस बारे में लोगों की उत्सुकता और भी ज्यादा बढ़ गयी है क्योंकि बीजेपी और योगी दोनों ही राम मंदिर बनवाने की बात करते आये हैं. योगी के मुख्यमंत्री बनते ही इस मामले में अब तेजी दिखाई देनी शुरू हो भी गयी है और इसे लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने भी एक अहम् टिप्पणी की है.

डॉक्टर सुब्रमण्यन स्वामी की बड़ी सफलता !

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को आपसी बातचीत के जरिये हल करने पर सहमति जताई है. दरअसल बीजेपी नेता डॉक्टर सुब्रमण्यन स्वामी काफी वक़्त से राम मंदिर मुद्दे पर कोर्ट में केस लड़ रहे हैं. उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि ये एक संवेदनशील मामला है इसलिए इस पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए.

जिस पर कोर्ट ने डॉक्टर स्वामी से कहा है कि वो कोर्ट के बाहर आपसी बातचीत के जरिये इस मामले को हल करने की कोशिश करें और यदि सहमति नहीं बनती तो कोर्ट इस मामले में मध्यस्था करने के लिए तैयार है. इसे डॉक्टर स्वामी की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि डॉक्टर स्वामी इससे पहले कई बार दावा कर चुके हैं कि यदि ये मामला कोर्ट के बाहर निपटाया जाता है तो वो मुस्लिमों को बड़ी आसानी से मना लेंगे.

सरयू के एक किनारे पर मंदिर और दूसरे पर मस्जिद !

स्वामी के मुताबिक़ राम का जन्म जिस जगह हुआ था, वो जगह कभी बदली नहीं जा सकती, हालांकि नमाज तो कहीं भी पढ़ी जा सकती है. स्वामी ने यह भी कहा कि वो राम मंदिर के मामले में मध्यस्थ बनने के लिए काफी समय से तैयार बैठे हैं.

स्वामी के मुताबिक़ आपसी बातचीत के जरिये इस मुद्दे को काफी पहले ही सुलझा लिया गया होता. उनके मुताबिक़ वो मुसलमानों को सरयू के पार ज़मीन देने के लिए तैयार हैं ताकि वो वहां मस्जिद बना लें और अयोध्या में राम मंदिर बनाने दें.

स्वामी पिछले साल ही ये बात साफ कर चुके थे कि राम मंदिर का निर्माण किसी आंदोलन के जरिए नहीं बल्कि कोर्ट के आदेश पर हिंदू व मुसलमानों की आपसी सहमति के बाद ही किया जाएगा. उनका दावा है कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच मैत्रीपूर्ण ढंग से इस मुद्दे का हल निकाला जा सकता है और अयोध्‍या में सरयू नदी के एक किनारे पर राम मंदिर और दूसरे किनारे पर मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है.

जानकारों के मुताबिक़ कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 2019 से पहले ही राम मंदिर बनने का काम शुरू हो जाएगा क्योंकि इस देश के मुसलमान भी इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं और आपसी सहमति से इसका हल काफी जल्द ही निकल आएगा.

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