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चीन की धोखेबाजी देख सुपर हरक्यूलिस विमान के साथ एक्शन में भारतीय सेना, चीनी सेना भौचक्की

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नई दिल्ली : चीन के इरादे नेक नहीं लग रहे हैं. डोकलाम मामले में भारत को युद्ध की धमियाँ देने वाले चीन ने एक बार फिर डोकलाम में अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं. वहीँ चीन से लगातार मिल चुनौती के बीच भारतीय सेना भी एक्शन में आ गयी है. भारतीय सेना चीन को बिलकुल हलके में नहीं लेना चाहती क्योंकि चीन का इतिहास ही रहा है धोखेबाजी का. चीन के दिमाग ठिकाने लगाने के लिए सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है.


चीन को जवाब देने के लिए सुपर हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट तैयार

बॉर्डर पर चीन की नापाक गतिविधियों से निपटने के लिए C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान तैयार किया गया है. भारतीय वायुसेना के वाइस मार्शल विक्रम सिंह का कहना है कि सुपर हरक्यूलिस युद्ध में अहम रोल निभाने की क्षमता रखता है. कोलकाता से 150 किलोमीटर दूर पनागढ़ स्थित अर्जन सिंह एयरपोर्ट स्टेशन पर चीन के छक्के छुड़ाने की क्षमता रखने वाला ये एयरक्राफ्ट तैयार किया गया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गाजियाबाद में हिंडन के बाद पनागढ़ देश में दूसरी जगह है जहां C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान का बेस है. भारतीय वायुसेना के मुताबिक़ अपनी तेज रफ्तार के कारण ये एयरक्राफ्ट कम समय में ही युद्ध क्षेत्र में पहुंचने की क्षमता रखता है.

चीन के लिए ख़ास खूबियों से लैस है ये विमान

इसके अलावा इसमें एक ख़ास बात और है कि ये एयरक्राफ्ट चीन के साथ लगी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल यानी एलएसी पर आसानी से निगरानी और कार्रवाई कर सकता है, जहां रनवे छोटे होने की वजह से विमानों के लिए उड़ान भरना आसान नहीं होता. साथ ही इस एयरक्राफ्ट को उन जगहों पर भी उतारा जा सकता है, जहां सेना के अन्य विमान उतर नहीं सकते.


सेना के मुताबिक ये मॉर्डन एयरक्राफ्ट फुरतीली एयरलिफ्ट और एयरड्रोप क्षमताओं के चलते एक बड़ी छलांग है. पूर्वी वायु कमान के एडवांस्ड हेडक्वार्टर के कमांडिंग एयर ऑफिसर सिंह ने कहा कि भविष्य में किसी भी लड़ाई में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

आधे घंटे से भी कम वक़्त में मचा देगा तबाही

क्या भारत और चीन के बीच युद्ध होने की स्थिति में सी-130जे सुपर हरक्यूलिस कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इस सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि हम किसी एक दुश्मन को ध्यान में रखकर विमान नहीं खरीदते लेकिन इसकी क्षमताओं को देखते हुए ऐसी स्थिति में निश्चित रूप से यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

किसी सैन्य अभियान के लिए पहुंचने में इस एयरक्राफ्ट को कितना समय लगेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पूर्व में चीन के साथ निकटवर्ती सीमा सिक्किम है और सी-130जे को यहां से पहुंचने में आधा घंटा से भी कम वक्त लगेगा. भारत और चीन के बीच डोकलाम में सड़क निर्माण को लेकर इस वर्ष गतिरोध रहा जो करीब तीन महीने चला था.


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