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मोदी के खिलाफ आये आईपीएस अधिकारी ने किया ऐसा काम, जिसे देख भारतीय सेना भी रह गयी दंग

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नई दिल्ली : मोदी सरकार के आने के बाद से कश्मीर में आतंकी हमले काफी अधिक होने लगे हैं, ऐसा कहकर विरोधी पीएम मोदी पर कीचड उछालते रहते हैं. हालांकि वो भूल जाते हैं कि जब कश्मीर से 5 लाख पंडितों को कत्लेआम करके व् उनकी स्त्रियों का बलात्कार करके भगा दिया गया, उस वक़्त मोदी की सरकार नहीं बल्कि देश में कांग्रेस की सरकार थी. जब मुम्बई में पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया उस वक़्त भी देश में कांग्रेस की ही सरकार थी. कश्मीर से अब एक और बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है.


आतंकियों के मारे जाने से खफा आईपीएस अधिकारी

दरअसल पीएम मोदी ने सत्ता में आने के बाद भारतीय सेना को घाटी से आतंकियों का सफाया करने का आदेश दे दिया. सेना बखूबी अपना काम कर भी रही है, जम्मू-कश्मीर पुलिस व् सीआरपीएफ जवानों के साथ मिलकर सेना अबतक 200 से अधिक खूंखार आतंकियों को ठोक चुकी है. मगर विपक्षी नेताओं के साथ-साथ अब तो कुछ उच्च पुलिस अधिकारियों ने भी पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

श्नीनगर के एसएसपी डॉ. शैलेंद्र मिश्रा का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. घाटी में अब तक अॉपरेशन अॉल आउट के तहत 200 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है, लेकिन 2009 बैच के आईपीएस मिश्रा ने आतंकियों के मारे जाने को सामूहिक विफलता बताया है.

आतंकियों को बताया मासूम और भटके हुए नौजवान

इन साहब को आतंकियों को मरते देख अपार दुःख हो रहा है. धूर्तता की सीमा तो देखिये, इस गद्दार आईपीएस अधिकारी ने ये बात मुंबई में ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही हैं. हालांकि कश्मीरी पंडितों की दयनीय हालत की ओर इसका ध्यान नहीं गया.

एसएसपी मिश्रा ने अपने 15 मिनट के भाषण में आतंकियों के मारे जाने पर शोक जताया. उन्होंने कहा, आतंकियों को मारे जाने पर जश्न नहीं मनाना चाहिए, यह हमारी सामूहिक विफलता का नतीजा है. आतंकी बनने के लिए इस अधिकारी ने हालात को जिम्मेदार ठहराते हुए आतंकियों को मासूम युवक घोषित कर दिया.


उन्होंने कहा, ‘वह क्या परिस्थितियां थीं, जिनके कारण बुरहान वानी आतंकवाद की ओर चला गया. वीडियो में उन्होंने कहा कि मैं एक ब्यूरोक्रेट हूं और भाषण देना मेरा काम नहीं, लेकिन मेरी निजी राय है कि भारत या कश्मीर में कोई आतंकवाद नहीं है, बल्कि कुछ नौजवान हैं, जिन्हें कार्यप्रणाली से शिकायत है. वे हमारे ही बच्चे हैं.

कश्मीरी पंडितों से कोई सहानभूति नहीं?

एसएसपी मिश्रा ने आगे कहा कि, ‘उनको मारने में हमें कोई खुशी नहीं मिलती. आज जो कोशिशें चल रही हैं, वह उन्हें जिंदा पकड़ने की चल रही हैं, ताकि उस रास्ते से उन्हें वापस लाया जा सकते, जहां पाकिस्तान उन्हें ले जाना चाहता है. हमें यह सोचना चाहिए कि आखिर बुरहान वानी और वसीम मुल्ला आतंकवादी क्यों बने?

सवाल ये है कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया गया और उन्हें उन्ही के राज्य से खदेड़ दिया गया. यदि हालात ही आतंकी बनने के लिए जिम्मेदार होते तो वो सब भी अब तक हथियार उठा चुके होते. मगर देश में बैठे कुछ गद्दार नेता व् बड़े अधिकारी लगातार आतंकियों की तरफदारी करते ही नज़र आ रहे हैं.


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