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अयोध्या में राम मंदिर को लेकर मुसलमानों ने कर दिया बड़ा एलान, पूरे देश की जनता रह गयी भौचक्की

नई दिल्ली : राम मंदिर बनाने को लेकर केंद्र में मोदी सरकार की राह अब और आसान हो गयी है. काफी वक़्त से यह मुद्दा अदालत में चल रहा है लेकिन ऐसा लग रहा है की अब जल्द ही इसका हल निकलने वाला है. क्यूंकि अभी मुस्लिम शिया वक़्फ़ बोर्ड ने राम मंदिर को लेकर अदालत में हलफनामा दे दिया जिसके बाद ज़रूर कुछ दूसरे कट्टर मुस्लिम संगठनों को ज़ोरदार मिर्ची लगने वाली है.


राम मदिर बनने की राह हुई अब और आसान

अभी अभी मीडिया रिपोर्ट्स से के मुताबिक पता चला है कि शिया वक्‍फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि जमीन के एक तिहाई हिस्से पर हक उनका है न कि सुन्नी वफ्फ बोर्ड का. शिया वक्‍फ बोर्ड की तरफ से दावा किया गया है कि ढहाई गई बाबरी मस्जिद उसकी प्रॉपर्टी थी और अब वो मस्जिद को विवादित स्थल से दूर कहीं मुस्लिम बहुल इलाके में बनाना चाहता है और राम जन्म भूमि पर ही भगवन राम का मंदिर बनना चाहिए. हमें उससे कोई आपत्ति नहीं होगी.

शिया वक़्फ़ बोर्ड ने शांतिपूर्ण रास्ता चुनने को कहा

आपको बता दें 11 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर को लेकर सुनवाई शुरू हो जाएगी. सात वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करने जा रहा है तो वहीँ इस मामले में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड ने भगवान की मर्जी से हस्तक्षेप किया है. शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हम इस विवाद का हल शांतिपूर्ण तरीके से चाहते हैं. शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि अगर मंदिर-मस्जिद का निर्माण हो गया तो इस लंबे विवाद और रोज-रोज की अशांति से मुक्ति मिल जाएगी.


बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि उसके पास 1946 तक विवादित जमीन का कब्जा था और शिया के मुत्वल्ली हुआ करते थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इस जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया था. शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि वह विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है. बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद बनवाने वाला मीर बकी भी शिया था. इसीलिए इस पर हमारा पहला हक बनता है.

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने मारा अड़ंगा

तो वहीँ शिया वक़्फ़ बोर्ड के इस समझौते को सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने सिरे से मानने से इंकार कर दिया है. उन्होंने कहा है की ये हलफनामा सिर्फ एक अपील है और इसकी कानून में कोई मतलब नहीं है. हम मस्जिद को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों में बांटने का आदेश दिया था. उसने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में समान रूप से बांटने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी.


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