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तीन तलाक के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों पर सुनाया शानदार फैसला, मुस्लिम संगठनों के उड़े होश !

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नई दिल्ली : गोधरा में कट्टरपंथियों द्वारा ट्रेन में कार सेवकों को जलाने के बाद भड़के गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. क्या 2002 के गुजरात दंगों में धार्मिक स्थलों स्थलों को हुए नुकसान की भरपाई राज्य सरकार को करनी चाहिए? हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकार को क्षतिग्रस्त मस्जिदों को हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा, जिसके बाद 2012 में गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी. आज इस पर फैसला आ गया है.

ध्वस्त मस्जिदों के निर्माण का पैसा सरकार नहीं देगी !

मंगलवार को इस अपील पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त मस्जिदों की भरपाई नहीं करेगी. दरअसल इस्लामिक रिलीफ सेंटर नाम की संस्था ने कोर्ट में याचिका दी थी कि धर्मस्थलों की सुरक्षा राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है. सरकार की गैरजिम्मेदारी से हुए नुकसान की उसे भरपाई करनी चाहिए.

जिसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य के सभी 26 जिलों में दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों की लिस्ट बनाने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता इस्लामिक रिलीफ सेंटर ने दावा किया था कि ऐसे स्थलों की संख्या 500 के करीब है, जिन्हे गुजरात दंगों के दौरान नष्ट कर दिया गया था, जबकि राज्य सरकार का कहना था कि संख्या इससे काफी कम है.

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जनता के टैक्स के पैसों से मस्जिदें नहीं बनवायी जा सकतीं !

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि, “संविधान के अनुच्छेद 27 के तहत करदाता को ये अधिकार दिया गया है कि उससे किसी धर्म को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स नहीं लिया जा सकता. ऐसे में, धर्मस्थलों के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से पैसा देना असंवैधानिक होगा.”

इसके अलावा ये गुजरात सरकार की आधिकारिक नीति है कि वो धर्मस्थलों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं करेगी. राज्य सरकार ने 2001 में आये भूकंप में क्षतिग्रस्त हुए धर्मस्थलों के लिए भी कोई मुआवज़ा नहीं दिया था.

हालांकि इस्लामिक रिलीफ सेंटर के वकील का कहना था कि भारत का संविधान धार्मिक भावनाओं को लेकर काफी उदार है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रफुल्ल गोरड़िया बनाम भारत सरकार मामले में हज सब्सिडी दिए जाने को भी सही ठहराया था. वहीँ सुप्रीम कोर्ट में मामले को सुनने वाली बेंच के अध्यक्ष जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि यदि गुजरात सरकार ने धर्मस्थलों की मदद के लिए कोई कानून बनाया होता और तब भी मुआवजा नहीं देती तो कोर्ट सरकार को आदेश दे सकता था, लेकिन ऐसा तो कोई कानून ही नहीं है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त मस्जिदों की भरपाई नहीं करेगी.


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