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मुख्य न्यायधीश के खिलाफ बेहद सनसनीखेज़ साज़िश का हुआ पर्दाफाश, पूर्व जज ने दिया मुँह तोड़ जवाब, इस षड़यंत्र को देख दंग रह जायेंगे आप

नई दिल्ली : आज भारत में दो अलग प्रकार के इतिहास रचे गए, एक ने देश का मान सम्मान कई गुना बढ़ा दिया तो एक ने मान सम्मान पर कालिख पोत दी. सुबह इसरो के 100 सॅटॅलाइट भेजने का इतिहास बना, तो वहीँ सुप्रीम कोर्ट के 4 जज ने पहली बार पद पर बने रहते हुए प्रेस कांफ्रेंस कर देश में लोकतंत्र की हत्या हो रही बता दिया. साथ ही खुद मुख्यन्यायधीश दीपक मिश्रा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. लेकिन सिर्फ दीपक मिश्रा को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है इसके पीछे का सच सुन आप भी दंग रह जाएंगे कि आखिर वामपंथियों की जड़ें कितना अंदर तक फैली हुई हैं.


मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ रची जा रही गहरी साज़िश

पहले हम आपको बताते हैं कि चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा. उन्होंने कहा “कि कभी-कभी होता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है. सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी”.

खोल दिए सिख दंगे के केस

अब हम आपको बताते हैं कि आखिरकार मुख्यन्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ अचानक से बगावती सुर कहाँ से उठने लगे और क्यों केवल दीपका मिश्रा को ही टारगेट किया जा रहा है. आपको बता दें मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को ही 1984 के सिख विरोधी दंगों के बंद कर दिये गए 186 मामलों की नये सिरे से जांच के आदेश दिए. इन तमाम केसेस कांग्रेस नेताओं के ही खिलाफ है जिनको बंद कर दिया गया था. जिसके लिए मोदी सरकार ने भी SIT गठित की थी. लेकिन SIT ने ये कहकर जांच करने से मना कर दिया था कि उनके पास अब पर्याप्त सबूत नहीं है.

सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को अनिवार्य किया था

भारत के चीफ जज हैं दीपक मिश्रा, ये वही जज हैं जिन्होंने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को अनिवार्य किया था. जिसके बाद अब इसे सुप्रीम कोर्ट ने वापस फैसले को पलट दिया. चीफ जज दीपक मिश्रा ने ही अयोध्या का मसला अपने पास रख लिया था, जबकि कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने राम मंदिर की सुनवाई 2019 लोकसभा चुनाव के बाद करने को कहा था.

याकूब मेमन को फांसी दी थी

आपको बता दें मुख्य जज दीपक मिश्रा वहीँ हैं जिन्होंने याकूब मेमन को फांसी दी थी, वही याकूब मेमन जिसका वकील था प्रशांत भूषण, जो इन चारों जजों का आज खूब समर्थन कर रहा है.

चारों जजों पर महाभियोग चलाया जाना चाहिए – आर एस सोढ़ी

तो वहीँ प्रेस कॉनफेरेन्स करने वाले चारों जज के खिलाफ खुद रिटायर जस्‍टिस आर एस सोढ़ी का गुसा फट पड़ा है. उन्होंने चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस करने को गलत करार दिया है. उन्‍होंने कहा, मुझे लगता है चारों जजों पर महाभियोग चलाया जाना चाहिए. इनके पास बैठकर बयानबाजी के अलावा कोई काम नहीं बचा. लोकतंत्र खतरे में है तो संसद है, पुलिस प्रशासन है. यह उनका काम नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इन चारों जजों को अब वहां बैठने का अधिकार नहीं है.


उन्होंने कहा कि मैं यह सब देखकर काफी दुखी हूं। हमारे बीच कई बार मतभेद हुए, लेकिन यह प्रेस के बीच कभी नहीं आया. वे सभी देश के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज हैं। ये चार या कोई और चार लोकतंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। यह अपरिपक्व व्यवहार है। इन चारों पर महाभियोग चलाकर घर भेज देना चाहिए। वे सुप्रीम कोर्ट में ट्रेड यूनियन जैसा सिस्टम बनाना चाहते हैं.

SC के 23 में से सिर्फ 4 को समस्या, एक्टिविस्ट बनना चाहते हैं जज

तो वहीँ अब इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस जजों के इस कदम को न्यायपालिका के लिए काला दिन बताया है. निकम ने कहा कि जजों को अपनी शिकायतों रखने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के अलावा कोई और रास्ता अपनाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि अब इस कदम के बाद देश का आम आदमी कोर्ट के हर फैसला पर सवाल उठा सकता है.निकम ने कहा कि अब से हर कोई न्यायपालिका के हर आदेश को संदेह की नजर से देख सकता है और हर फैसले पर सवाल उठाए जा सकते हैं.

जजों और प्रशांत भूषण के बीच कोई अंतर नहीं रहा.

बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अमिताभ सिन्हा ने कहा, ‘जजों को एक्टिविज्म में शामिल नहीं होना चाहिए, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाना चाहिए. उन्होंने सर्वोच्च न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को कम करने का काम किया है.’ सिन्हा ने कहा कि आज इन जजों और प्रशांत भूषण के बीच कोई अंतर नहीं रहा.

ममता बनर्जी भी कूदी कांग्रेस संग विवाद में

तो वहीँ हरबार की तरह कांग्रेस पर्त्य को राजनितिक गुब्बारा मिल गया है खेलने के लिए. जैसे ही उन्होंने लोकतंत्र की हत्या होते हुई सुना, फ़ौरन राहुल गाँधी ने प्रेस कॉनफेरेन्स बुला ली और मोदी सरकार पर निशाना साध दिया. तो हर बार की तरह इस मामले में ममता बनर्जी भी कूद गयी हैं. ममता ने कई ट्वीट करके कहा कि देश का लोकतंत्र खतरे में है. ममता ने लिखा, “हम आज सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के उठाए गए सवाल से दुखी हैं. सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए सवालों से एक नागरिक के तौर पर मैं बहुत दुखी हूं. न्यायपालिका और मीडिया लोकतंत्र के स्तंभ हैं. केंद्र सरकार का न्यायपालिका में बहुत ज्यादा दखल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.”

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया, ‘‘हम यह सुनकर बहुत चिंतित हैं कि उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने शीर्ष न्यायालय के कामकाज पर चिंता जतायी है. लोकतंत्र खतरे में है.’’


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