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तीन तलाक के बाद कश्मीर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया जबरदस्त फैसला, पूरे देश में मची धूम !

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नई दिल्ली : तीन तलाक पर रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक और जबरदस्त फैसला लिया है, जिससे पूरे देश में धूम मच गयी है, मगर कश्मीर में जोरदार हिंसा व् आगजनी की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेषाधिकार देने वाले संविधान के आर्टिकल 35ए के खिलाफ आयी याचिका को मंजूरी दे दी है. बता दें कि इसे मोदी सरकार की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, वहीँ कश्मीरी नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है.

आर्टिकल 35A के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में मंजूर !

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेषाधिकार देने वाले संविधान के आर्टिकल 35A के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार को नोटिस जारी करके इस बारे में उनका रुख पूछा था.

इस नोटिस पर बिलकुल देर ना करते हुए मोदी सरकार ने अपना रुख कोर्ट में स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार के मुताबिक़ इसे ख़त्म कर देना चाहिए. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को मंजूरी दे दी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा सरकार के उस आवेदन को भी स्वीकार किया है, जिसमे कहा गया है कि इस याचिका की सुनवाई दिवाली के बाद की जाए. यानी इस याचिका पर दिवाली के बाद सुनवाई की जायेगी. कोर्ट के आदेश के फ़ौरन बाद से कश्मीर के कई इलाकों में हिंसा की जानी शुरू हो गयी है.

सुनवाई पर केंद्र को कोई आपत्ति नहीं

चीफ जस्टिस सहित न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी और वकील शोएब आलम ने स्पष्ट किया है कि केंद्र की मोदी सरकार को दीवाली के बाद याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर कोई आपत्ति नहीं है.

देखिये ज़ी न्यूज़ का ये ट्वीट !

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तीन जजों की पीठ करेगी सुनवाई

पीठ ने कहा, ‘सभी याचिकाओं पर दीवाली के बाद सुनवाई होगी.’ इससे पहले कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किये जाने का समर्थन किया था. कोर्ट ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई करेगी कि क्या आर्टिकल 35A संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर है या इसमें कोई प्रक्रियागत खामी है. इसके बाद इसे इसे पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाएगा.

कश्मीरी महिलाओं को मूल अधिकारों से वंचित रखता है ये आर्टिकल ?

बता दें कि चारू वली खन्ना की ओर से संविधान के आर्टिकल 35A और जम्मू-कश्मीर के संविधान के प्रावधान 6 को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की गयी थी, जिसपर कोर्ट सुनवाई कर रहा था. दोनों प्रावधान जम्मू-कश्मीर के ‘स्थाई निवासियों’ से जुड़े हुए हैं.

इस याचिका में कुछ विशेष प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जैसे यदि कोई कश्मीरी युवती जम्मू-कश्मीर के बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करती है तो उसे कश्मीर में संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता है. इस प्रावधान के तहत राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला का संपत्ति पर अधिकार समाप्त हो जाता है, इतना ही नहीं उसके बेटे को भी संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता.

याचिका में ये भी कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के संविधान का प्रावधान 6 एक महिला के अपनी मर्जी से विवाह करने के मूल अधिकार को प्रतिबंधित करता है क्योंकि यदि वो किसी गैर कश्मीरी से विवाह करती है तो उस महिला का संपत्ति का अधिकार समाप्त हो जाता है. यहाँ तक कि उस महिला के बच्चों तक को स्थाई निवासी प्रमाणपत्र नहीं मिलता है, ऐसे में वो कानून की नजर में अस्वीकार्य हो जाते हैं.

महिला यदि जम्मू-कश्मीर की स्थाई निवासी है, तब भी उसे संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं मिलता. उनका स्थानीय चुनावों में वोट तक डालने का अधिकार ख़त्म कर दिया जाता है. याचिका में आर्टिकल 35A की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह अनुच्छेद कभी संसद में पेश ही नहीं हुआ बल्कि इसे तो राष्ट्रपति के आदेश पर लागू किया गया था. इस प्रावधान को 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने धारा 370 में प्रदत्त राष्ट्रपति के अधिकारों का उपयोग करते हुए ‘संविधान (जम्मू एवं कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश 1954’ को लागू किया था.


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