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आतंकवाद के जनक सऊदी में कर मुक्त व्यवस्था खत्म

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नई दिल्ली : इस्लामिक आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने ही वाला है. सलाफी इस्लाम की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है जिसकी वजह से कर मुक्त जीवन अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी. आपको बता दें, खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी.


कंगाली के कगार पर सऊदी

2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी जिससे हालात बदल गए हैं. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. सोमवार को सऊदी अरब की कैबिनेट ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों में मूल्य संवर्धित कर यानी कि वैट व् चुनींदा करों के लिए एकीकृत समझौते को मंजूरी दे दी.


इस समझौते के बाद अब सऊदी अरब व् अन्य खाड़ी देश साल 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाएंगे. ये एक बड़ा फैसला है जिसके बाद से सऊदी अरब में दशकों से लागू कर मुक्त संहिता का अंत हो गया.

मुफ्तखोरी ख़त्म होने से आतंक का सफाया

जानकारों के मुताबिक़ इसी के साथ दुनिया में आतंकवाद में भी भारी कमी आएगी, क्योंकि सऊदी अरब को ही आतंक का जनक माना जाता है. तेल बेचकर आयी अथाह दौलत का इस्तेमाल दुनिया में सलाफी विचारधारा के प्रचार और आतंक को प्रायोजित करने के लिए किया जाता रहा है किन्तु अब वो दिन लदने लगे हैं. जैसे-जैसे सऊदी तेल व्यापार ठप्प होता जाएगा वैसे-वैसे पैसे कमाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और व्यापारिक सम्बन्ध बनाने के लिए दूसरे देशों के साथ अच्छे तालमेल बिठाने पड़ेंगे. सऊदी जलवायु बहुत ज्यादा उद्योग व् व्यापार के अनुकूल भी नहीं है, ऐसे में दूसरे देशों पर निर्भर रहना पडेगा. मेहनत से कमाए गए पैसे का महत्व समझ में आएगा.


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