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पिता मुलायम सिंह का इतना जबरदस्त अपमान, खामोशी से देख रहे हैं अखिलेश !

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नई दिल्ली : सत्ता का नशा भी एक ऐसी चीज है कि जिसे ये एक बार लग जाता है फिर गद्दी पाने के लिए वो हर जतन करता है. यूपी चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. चुनाव से पहले जहां समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव हुआ करते थे, वहीँ अब पार्टी की कमान उनके बेटे अखिलेश यादव ने अपने हाथों में ले ली है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से अपने पिता की हटाकर वो खुद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. इतने पर ही गनीमत थी कि अब ऐसी खबर सामने आयी है जिसपर यकीन करना भी मुश्किल हो रहा है.

समाजवादी पार्टी में मुलायम का सूर्य अस्त?

समाजवादी पार्टी में मुलायम और चाचा शिवपाल यादव को किनारे करके अखिलेश पूरा चुनाव खुद के दम पर लड़ रहे हैं. लेकिन अब खबर आ रही है कि समाजवादी पार्टी के छोटे-मोटे नेता व् उम्मीदवार भी अब मुलायम सिंह यादव से कन्नी काटने लगे हैं. यूपी में चार चरणों की वोटिंग हो चुकी है लेकिन मुलायम प्रचार से लगभग गायब दिखाई दे रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान 300 रैलियों को संबोधित करने वाले मुलायम सिंह यादव ने अब तक केवल 3 रैलियां ही की हैं.

समय बड़ा बलवान होता है, ये कहवात मुलायम पर बेहद सटीक बैठती है. एक वो भी वक़्त था जब समाजवादी पार्टी का नारा हुआ करता था कि “जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है” और एक ये वक़्त है जब सपा में कोई उन्हें पूछने तक को तैयार नहीं है. कहने को तो वो पार्टी के स्टार प्रचारक हैं लेकिन कोई भी उम्मीदवार उनसे प्रचार ही नहीं करवाना चाहता.


रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जसवंतनगर में शिवपाल यादव के लिए वोट मांगते वक़्त मुलायम ने आरएलडी के उम्मीदवार आशीष राजपूत के लिए भी वोट मांग लिए. दरअसल आशीष पहले समाजवादी पार्टी में ही थे शायद इसीलिए भूलवश मुलायम उनके लिए भी वोट मांग बैठे. जिसके बाद आशीष ने मुलायम के पैर भी छुए थे. कहा जा रहा है कि इसके बाद से ही समाजवादी पार्टी के अन्य उम्मीदवार उनसे कन्नी काटने लगे हैं.

पिता का अपमान खामोशी से देख रहे हैं अखिलेश !

नाम जाहिर ना करने की शर्त पर सपा के एक उम्मीदवार ने बताया कि चुनाव प्रचार के वक़्त मुलायम भूल जाते हैं कि उन्हें क्या कहना है और किसके लिए कहना है. यही वजह है कि अन्य उम्मीदवार उनसे बच रहे हैं. वैसे भी पूरा चुनाव तो अखिलेश यादव के नाम पर ही लड़ा जा रहा है और हाल ही में अखिलेश और मुलायम के रिश्ते तल्ख़ होने के कारण यदि मुलायम अखिलेश के बारे में कुछ गलत कह देंगे तो चुनाव प्रचार में बड़ा नुक्सान हो जाएगा.

कुल मिला कर फिलहाल सपा में मुलायम सिंह यादव को बिलकुल किनारे कर दिया गया है. कोई उम्मीदवार उनसे अपना प्रचार नहीं करवाना चाहता. कोई उन्हें अपनी रैली में नहीं बुलाना चाहता. अखिलेश चुपचाप सब कुछ देख रहे हैं. कुर्सी के लिए परिवार के अंदर इतना बड़ा संघर्ष मुग़ल शासन के बाद देश पहली बार देख रहा है.


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