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कश्मीरी पत्थरबाजों को लेकर आयी बेहद सनसनीखेज खबर, सेना के साथ-साथ मोदी भी रह गए हक्के-बक्के !

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नई दिल्ली : कश्मीर में इन दिनों पत्थरबाजों ने बड़ा आतंक मचाया हुआ है. आये दिन कई कश्मीरी युवक सेना के जवानों पर पत्थरबाजी करते ही रहते हैं. सबसे बड़ी दिक्कत तब खड़ी होती है, जब आतंकी एनकाउंटर के दौरान भी ये पत्थरबाज आतंकियों के बचाव के लिए खड़े हो जाते हैं और पत्थर फेकने लगते हैं. काफी वक़्त से देशभर में इन पत्थरबाजों के खिलाफ काफी गुस्से का माहौल बन गया है, लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है उसे देख तो ये पत्थरबाज भी अंदर तक हिल गए हैं.


एक ट्रक पत्थर लेकर कश्मीर जाएगी संतों की सेना !

दरअसल अब संतों ने कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकियों से जूझ रहे सेना और सीआरपीएफ जवानों की मदद करने की ठान ली है. इसके लिए संतों का एक जत्था कश्मीर रवाना होने की तैयारी में भी जुट गया है. कानपुर के एक हिंदूवादी संगठन “जन सेना” के बैनर तले लगभग 1000 संत 7 मई को सेना की सहायता के लिए कश्मीर जाने के लिए निकलेंगे. सबसे जबरदस्त बात तो ये है कि ये संत अपने साथ पत्थरों से भरा ट्रक भी ले जाएंगे ताकि पत्तरबाजों को उन्ही की भाषा में सबक सिखाया जा सके.

पत्रकारों से बात करते हुए जन सेना के संस्थापक और जाजमऊ स्थित मंदिर के मुख्य पुजारी बालयोगी चैतन्य महाराज ने बताया कि जो लोग सेना के जवानो पर पत्थर फेक रहे हैं, वो देशद्रोही हैं. ऐसे देशद्रोहियों को उन्ही की भाषा में जवाब देने के लिए उन्होंने पत्थरबाजों की सेना तैयार की है. उन्होंने कहा कि यदि जरुरत पड़ी तो और भी संत कश्मीर भेजे जाएंगे.


पत्थरबाजों के खिलाफ जनता में बढ़ रहा गुस्सा !

उन्होंने अपनी इस मुहिम को “विजय यज्ञ” नाम दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी से इजाजत मांगी थी कि कश्मीरी पत्थरबाजों की अक्ल ठिकाने लगाने और सेना के जवानों का हौंसला बढ़ाने के लिए जाने दिया जाए लेकिन पीएम से उन्हें इजाजत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन ने भी इसकी इजाजत मांगी मगर वहां भी उन्हें इजाजत नहीं मिली. लेकिन अब उन्होंने परिणामों की परवाह किए बिना, अपनी इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया है. उन्होंने कहा कि यदि उन्हें रोका गया तो वो अपने-अपने स्तर पर फिर से वहां जाएंगे और एकजुट हो जाएंगे.

संतों के इस जत्थे के कश्मीर जाने के लिए बाकायदा 100 कारें और 3 बसें बुक कर ली गयी हैं. संतों की संख्या इतनी ज्यादा है कि सभी लोग कारों व् ट्रकों से नहीं जा सकते इसलिए बाकी के संत ट्रेन से 14 मई को कश्मीर पहुंचेंगे. ये संत अपने साथ पत्थरों से भरा ट्रक भी ले जाएंगे. इन संतों को कानपुर में ही पत्थर मारने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

संत अपनी इस मुहिम में कामयाब हो पाएंगे या नहीं, ये तो नहीं कहा जा सकता, ना ही ये कहा जा सकता है कि पत्थरबाज अपनी हरकतों से कभी बाज आएंगे या नहीं, लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि देश की जनता के मन में अब कश्मीर में पनप रहे अलगाववाद व् आतंवाद के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में यदि कई अन्य समुदाय या संगठन भी दल-बल के साथ कश्मीर पहुंचने लगे तो कश्मीरी पत्थरबाजों का क्या होगा ये तो भगवान् ही मालिक है.


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