Home > ख़बरें > चीन को सबक सिखाने के लिए लाखों जवानों ने उठाया ऐसा कदम, जिसे देख चीन के होश हुए फाख्ता

चीन को सबक सिखाने के लिए लाखों जवानों ने उठाया ऐसा कदम, जिसे देख चीन के होश हुए फाख्ता

modi-jinping-boycott

नई दिल्ली : 1962 में भारत के पहले पीएम नेहरू के वक़्त भारत से जंग जीत लेने वाले चीन को लगा कि वो डोकलाम ट्राई जनक्शन में भी आसानी से घुसपैठ कर लेगा और भारत देखता रह जाएगा. लेकिन चीन भूल गया कि ना तो आज भारत 1962 वाला है और ना ही देश में कांग्रेस की सरकार है. भारत के जवानों ने चीन को ऐसा जख्म देने की ठान ली है, जिसे चीन सदियों तक भुला नहीं पायेगा.

1962 में भारत की पीठ में छुरा भोंक कर भारत की हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लेने के बावजूद कांग्रेस ने चीन के साथ व्यापार ना केवल जारी रखा बल्कि तब से अबतक उसे हजारों गुना बढ़ा भी लिया. कायदे से तो जब तक चीन भारत की जमीन लौटा नहीं देता, तब तक उसके साथ एक पैसे का व्यापार भी नहीं होना चाहिए था.

जो काम कांग्रेस ने नहीं किया, वो काम अब आरएसएस के हजारों जवानों ने करना शुरू कर दिया है. आरएसएस ने “चीन की कमर तोड़ो” अभियान की शुरुआत की है. चीन को आर्थिक नुक्सान दे कर उसे कंगाल करने के लिए आरएसएस के हजारों जवान गली मोहल्लों, स्कूल कॉलेजों और चौराहों पर जा-जाकर लोगों को जागरूक करने की मुहिम में जुट गए हैं.

आरएसएस अपने सहयोगी संगठनों के जरिए देश में बड़े स्तर पर एक आंदोलन खड़ा करने की भी कोशिश कर रहा है. व्यापारियों का विरोध सामने न आए, इसलिए आरएसएस ने आंदोलन की भूमिका महीनों पहले ही बना ली थी और व्यापारियों के पास ये संदेश कई तरीकों से पहुंचा दिया गया था कि वो रोज़मर्रा की जरूरतों के सामान या फिर त्योहारों की खपत के सामान का स्टॉक न रखें.


6 महीने पहले से भूमिका बनाने के बाद आंदोलन को शुरू किया गया है. 1 अगस्त से 15 अगस्त के बीच आरएसएस से जुड़े तमाम संगठन आम लोगों और उपभोक्ताओं से मिलकर उनसे चीनी सामान को ना खरीदने की अपील कर रहे हैं. लोगों को समझाया जा रहा है कि कैसे चीन भारत से प्रतिवर्ष अरबों रुपये कमाता है और अहसानमंद होने की जगह भारत को युद्ध की धमकी देता है. भारत की जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत करता है.

चीन का सामान तो वैसे भी अपनी खराब गुणवत्ता के लिए बदनाम है, ऐसे में यदि भारतीय जनता चीनी सामान का पूर्ण बहिष्कार कर देती है तो ना केवल देश का पैसा देश में रहेगा बल्कि चीन को कंगाल होते भी देर ना लगेगी. वहीँ पीएम मोदी पूरी ताकत से “मेक इन इंडिया” के मिशन में जुटे हुए हैं.

इसी आंदोलन के तहत टैगोर गार्डन में स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को पर्चे बांटे, जिस पर लिखा है “सेव इकोनॉमी-सेव बार्डर”. आज का ज़माना बदल चुका है, युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है. इससे तो दोनों देशों का नुक्सान ही होगा, लेकिन यदि चीन का आर्थिक बहिष्कार कर दिया जाए तो इतनी विशाल चीनी सेना की तनख्वाह तक चीन नहीं निकाल पायेगा.

वैसे ये काम चीन बखूबी करता आ रहा है. चीन का पैसा दुसरे देशों में ना जाए, इसके लिए चीन ने कई विदेशी कंपनियों पर अपने देश में प्रतिबन्ध लगाया हुआ है. यहाँ तक कि चीन में तो गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियों पर भी प्रतिबन्ध लगा हुआ है. ऐसे में आरएसएस की कोशिश है कि बड़े पैमाने पर देशभर में जन-आंदोलन खड़ा किया जाए और चीन के सभी सामानों का बहिष्कार किया जाए. लोगों से अपील की जा रही है कि किसी भी सामान को खरीदने से पहले वो दुकानदार से सवाल करें कि सामान कहीं चीनी तो नहीं? चीनी सामान हो तो कतई ना खरीदें.


इस न्यूज़ को अपने मित्रों के साथ शेयर करना न भूलें। आपकी सुविधा के लिए शेयर बटन्स नीचे दिए गए हैं।
सब्सक्राइब करें हमारा यू-ट्यूब चैनल


हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें


फेसबुक पेज लाइक करें

loading...

Comments