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सुप्रीम कोर्ट से आयी रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर ऐसी खौफनाक खबर, जिसे देख आप दंग रह जाएंगे

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नई दिल्ली : रोहिंग्या मुस्लिमों का मुद्दा गर्माता जा रहा है. मोदी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा गया था कि रोहिंग्या मुस्लिम देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं और इनका सम्बन्ध आती संगठनों से भी पाया गया है. मगर देश के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिम भी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं और सुप्रीम कोर्ट में इन्होने जो कहा है, उसे सुनकर आप भी खौफ से भर जाएंगे.


भारत सरकार पर उठायी उंगलियां

रोहिंग्याओं ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके सुरक्षा की गुहार लगाते हुए भारत सरकार पर ही उंगलियां तान दी हैं. रोहिंग्या याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कहा कि भारत सरकार रिफ्यूजी पर बनाई अपनी गाइड लाइन से नहीं मुकर सकती और उन्हें नहीं निकाल सकती.

हैरत की बात है कि अवैध तरीके से घुसपैठ किये इन रोहिंग्या मुस्लिमों ने अभी से ही भारत सरकार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू भी कर दी है. ज़रा सोचिये कि कल को क्या ये लोग आरक्षण की मांग करेंगे. देश में एक नए अल्पसंख्यक बनकर अल्पसंख्यक अधिकारों की मांग नहीं करेंगे? और वो भी सब सब कुछ जनता के टैक्स से.


हलफनामे में बोला सफ़ेद झूठ

इन रोहिंग्याओं ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा है कि उनके साथ तिब्बतियों और श्रीलंका के शरणार्थियों जैसा बरताव किया जाए. सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में भी रोहिंग्या झूठ बोलने से बाज नहीं आये. रोहिंग्याओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि रोहिंग्या का किसी भी आईएसआई और इस्लामी स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से कोई संबंध नहीं हैं, यानी भारत सरकार और खुफिया एजेंसियां झूठ बोल रही हैं.

हलफनामे में यहाँ तक कहा गया कि भारतीय सीमा के अंदर ऐसा कोई रोहिंग्या नहीं है, जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हो, जोकि सरासर सफ़ेद झूठ है, हाल ही में कई ऐसे रोहिग्या पकडे गए हैं, जिनसे साबित होता है कि वो देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं. वहीँ पश्चिम बंगाल के बाल अधिकार आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या मुस्लिमों को म्यांमार वापस भेजे जाने के खिलाफ याचिका दायर की है

भारत में 40 हजार रोहिंग्या

बता दें कि जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने सदन में कहा था कि अभी तक भी रोहिंग्या आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं मिला है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत के विभिन्न प्रांतों में रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या लगभग 40,000 के करीब है. गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में रोहिंग्या को देश के लिए बड़ा खतरा बताया गया है. केन्द्र ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि रोहिंग्या कई तरह की आतंकी गतिविधियों में लिप्त हैं और इनके तार आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं.


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