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पीएम मोदी ने दिखाए अपने भगवा तेवर, सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर मोदी सरकार ने लिया हाहाकारी एक्शन

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नई दिल्ली : देश का मीडिया तथाकथित सेकुलरिज्म के नाम पर आप तक कई ख़बरें पहुचने ही नहीं देता है. ऐसी ही एक जबरदस्त खबर आइये हम आपको बताते हैं, दरअसल प्रधानमंत्री मोदी देश हित के लिए दुनियाभर से दुश्मनी मोल लेने को तैयार हो गए हैं. यूएन से लेकर कई बड़ी शक्तियों के विरोध के बावजूद पीएम मोदी ने एक ऐसा काम शुरू किया है जिसे करने का साहस इससे पूर्व की सरकारों ने नहीं किया. ऐसा ही एक बड़ा फैसला अब लिया गया है, जिसे अब तक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला बताया जा रहा है.


रोहिंग्याओं के साथ-साथ अवैध-बांग्लादेशियों को भी बाहर निकालने का काम शुरू !

रोहिंग्या समर्थकों व् तथाकथित मानवाधिकारी संगठनों को बड़ा झटका लगा है. मोदी सरकार और बीजेपी रोहिंग्या मुस्लिमों के साथ-साथ अगले 1 साल में 4 करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी भारत से बाहर करने की तैयारी कर चुकी है.

रोहिंग्या मुस्लिमों को तो सुप्रीम कोर्ट का मामला ख़त्म होते ही इसी साल वापस म्यांमार भेजा जाएगा, म्यांमार को इसके लिए राजी भी कर लिया गया है. साथ ही साथ लगे हाथों अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी बाहर निकालने की तैयारियां की जा रही हैं. रास्ते में आने वाली चुनौतियों को हटाया जा रहा है.

एक्शन में मोदी सरकार !

दरअसल अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों को देश से बाहर करने की मांग काफी वक़्त से उठती आ रही है. जब से पीएम मोदी सत्ता में आये हैं, तब से ये मांग और तेज हो गयी थी. सेकुलरिज्म के नाम पर देश में अशांति ना फैले इसके लिए कानूनी तरीके से अवैध बांग्लादेशियों को निकालने की कवायद शुरू की गयी.

अब बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसकी सुनवाई करने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने इज़ाज़त दे दी है और अगले 3 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई होगी. इस याचिका में अवैध बांग्लादेशियों को 1 साल के अंदर-अंदर भारत से खदेड़ने की मांग की गयी है. ये पहला स्टेप है और अब सुप्रीम कोर्ट इसपर सुनवाई करेगा.

देखिये उनका ये ट्वीट, जिसमे उन्होंने इस बारे में जानकारी दी है.


ये स्टेप केवल इसलिए जरूरी है क्योंकि मानवाधिकार, कोंग्रेसी व् मुस्लिम संगठन तो वैसे भी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे, उनसे पहले बीजेपी ही सुप्रीम कोर्ट चली गयी ताकि बाद में काम में कोई दिक्कत ना आये. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की बेंच तो पहले ही फैसला सुना चुकी है और सरकार को आदेश दे चुकी है कि 25 मार्च 1971 के बाद अवैध तरीके से भारत में आये तमाम बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जाए.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाकर सील करने के भी आदेश दिए थे, जिसपर काम लगभग पूरा हो भी चुका है. अब इस आखिरी स्टेप के बाद 2019 के चुनाव से पहले ही अवैध बांग्लादेशी देश से बाहर होंगे, ये बात तय हो चुकी है.

सरकार ने तेजी से इसपर काम करना शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में इन अवैध बांग्लादेशियों की संख्या फिलहाल 3 करोड़ से भी ज्यादा है. वहीँ इनमे से 1 करोड़ तो अकेले बंगाल और असम में रहते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कई राजनीतिक पार्टियों द्वारा इन्हें देश के अलग हिस्सों में बसाया गया है और चुनाव के वक़्त वोटबैंक की तरह इनका उपयोग किया जाता है. इनके बाहर होते ही देश की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.


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