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रिलायंस जियो ने पीएम मोदी को दिया धोखा, ये है देश को हिला देने वाला सबसे बड़ा कांड !

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नई दिल्ली : भारत में अपनी टेलिकॉम सर्विस लॉन्च करते के साथ फ्री वौइस् कॉल और फ्री 4G इन्टरनेट डाटा देकर रिलायंस जियो ने ग्राहकों के बीच अपनी धाक जमा ली. खबर आयी कि जिओ ने शुरुआत के पहले ही महीने में अपने 1 करोड़ से ज्यादा ग्राहक बना लिए थे और ये आंकड़ा कुछ ही वक़्त में 10 करोड़ हो गया. लेकिन इन सबके बीच अब एक ऐसी हैरतअंगेज खबर निकल कर सामने आयी है जिसने सारे देश को हिला कर रख दिया है.

63.77 करोड़ रुपये के झोल से सरकार को चपत !

खबर आयी है कि जिओ कंपनी ने मार्च 2015 तक अपने पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर में कंपनी की आमदनी 63.77 करोड़ रुपये कम दिखा कर सरकार को मोटा चूना लगाया. खबर है कि कंपनी ने फॉरेक्स से उसे हुए फायदे को अपनी कुल आमदनी में नहीं दिखाया जिस कारण लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को कम रकम मिली.

डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट फॉर पोस्ट ऐंड टेलिकम्युनिकेशंज ने 5 पन्ने की एक रिपोर्ट बनायी है और अब इस रिपोर्ट पर मुकेश अंबानी से जवाब तलब किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक़ जियो को फिस्कल इयर 2012-13 से 2014-15 के बीच फॉरेक्स से तकरीबन 63.77 करोड़ रुपये, फिस्कल ईयर 2013 में 1.29 करोड़ रुपये, 2013 में 41.67 करोड़ रुपये और 2015 में 20.81 करोड़ रुपये का फॉरेक्स गेन हासिल हुआ था.

जिओ से जवाब तलब

लेकिन लाइसेंस के नियम और शर्तों का उल्लंघन करते हुए इन फॉरेक्स गेंस को रेवेन्यू शेयर के लिए जरूरी AGR में शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण लाइसेंस फी कम बनी. बताया जा रहा है कि जिओ की ओर से अब तक इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया गया है. हालांकि कहा जा रहा है कि जिओ जल्द ही इस मामले अपना जवाब भेजेगा.

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि उस समय रिलायंस जियो के मैनेजमेंट की ओर से इस मामले में दी गयी सफाई से ऑडिटर संतुष्ट नहीं हुआ था. फिलहाल जिओ को जवाब देने के लिए 6 हफ्तों का वक़्त दिया गया है. जिओ की ओर से आये रिस्पांस को अब फाइनल ऑडिट रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.

हालांकि इस पूरे मामले को लेकर जिओ का कहना है कि डॉट की ओर से फॉरेक्स गेंस पर लाइसेंस शुल्क भुगतान करने की मांग की गयी थी, जिसको जिओ ने टेलिकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट अपेलट ऐंड ट्राइब्यूनल (TDSAT) में चुनौती दी थी. खैर अब इस पूरे मामले में जिओ को जवाब देना है कि 63.77 करोड़ रुपये का झोल आखिर हुआ कैसे? और अगर इसके लिए वाकई जिओ जिम्मेदार है तो क्या जिओ पर जुर्माना लगाया जा सकता है?

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