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राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया सनसनीखेज फैसला, राहुल ने भी दिया हिन्दुओं को धोखा

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नई दिल्ली : भारत की दशा कितनी दयनीय हो चुकी है, इस बात का अंदाजा आपको इस बेहद शर्मनाक खबर को पढ़कर हो जाएगा. अपने ही देश में अपने ही आराध्य भगवान् राम का मंदिर बनाने के लिए हिन्दुओं को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. राम मंदिर को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोंग्रेसी नेता व् सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने दस्तावेज पूरे ना होने की दलील दी और दिवाली पर पटाखे, दही-हांडी व् जल्लिकट्टु पर फ़टाफ़ट बैन लगा देने वाले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाल दी, वो भी एक या दो दिन के लिए नहीं बल्कि पूरे दो महीनों के लिए.


हिन्दुओं की आँखों में धुल झोंक रहे राहुल गाँधी

देश की लचर राजनीति और महाभ्रष्ट न्याय व्यवस्था को तो देखिये कि एक ओर तो राहुल गाँधी गुजरात चुनाव में हिन्दुओं की आँखों में धुल झोंकने के लिए मंदिरों के चक्कर काट रहे हैं, जनेऊ धारण कर रहे हैं, वहीँ कोंग्रेसी नेता कपिल सिब्बल राम मंदिर के खिलाफ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से केस लड़ रहा है.

वहीँ न्याय व्यवस्था हिन्दुओं के खिलाफ आने वाले मामले तो इतनी फुर्ती से निपटाती है, मगर राम मंदिर के मामले को तरह-तरह के बहानों द्वारा खींच-खींच कर जबरदस्ती लंबा किया जा रहा है. कश्मीरी पंडितों के न्याय की किसी को चिंता नहीं है, राम मंदिर कभी बनने देना नहीं चाहते मगर दिवाली पर पटाखे फ़टाफ़ट बैन कर दिए जाते हैं. ये हालत तो तब है जब देश में हिन्दू बहुसंख्यक हैं.

सालों से मामला लटका हुआ है और दस्तावेज तक पूरे नहीं हो रहे?

बता दें कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की 25वीं वर्षगांठ से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. गुजरात चुनाव निकट हैं, लिहाजा सुनवाई हुई तो कांग्रेस के वोटों को ख़तरा हो जाएगा. इसलिए सिब्बल पहुंच गए अपनी दस्तावेज अधूरे हैं की दलील ले के और कोर्ट ने भी फटाक से अगली तारीख दे कर पल्ला झाड़ दिया.

कोर्ट में अब अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी. अगला मजाक देखिये, राहुल भले ही खुद को शिव भक्त कह रहे हैं मगर सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मामले की सुनवाई 2019 तक टालने तक कही है, ताकि बीजेपी को चुनावी फायदा ना मिल जाए. यानी एक ओर खुद को हिन्दू कहने वाले कोंग्रेसी, राम मंदिर नहीं बनने देना चाहते.


क्या दलील दे रहे हैं वकील?

सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने मांग की है कि मामले की सुनवाई 5 या 7 जजों बेंच को 2019 के आम चुनाव के बाद करनी चाहिए. क्योंकि मामला राजनीतिक हो चुका है. सिब्बल ने कहा कि रिकॉर्ड में दस्तावेज अधूरे हैं. कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने इसको लेकर आपत्ति जताते हुए सुनवाई का बहिष्कार करने की बात कही है.

कपिल सिब्बल ने कहा कि राम मंदिर एनडीए के एजेंडे में है, उनके घोषणा पत्र का हिस्सा है इसलिए 2019 के बाद ही इसको लेकर सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 2019 जुलाई तक सुनवाई को टाला जाना चाहिए.
इसके जवाब में यूपी सरकार की ओर से पेश हो रहे तुषार मेहता ने कहा कि जब दस्तावेज सुन्नी वक्फ बोर्ड के ही हैं तो ट्रांसलेटेड कॉपी देने की जरूरत क्यों हैं?

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में निर्णायक सुनवाई कर रही है. मामले की रोजाना सुनवाई पर भी फैसला होना है. मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि अगर सोमवार से शुक्रवार भी मामले की सुनवाई होती है, तो भी मामले में एक साल लगेगा.

राजनीति पर ध्यान ना दे कोर्ट

रामलला का पक्ष रख रहे हरीश साल्वे ने कोर्ट में बड़ी बेंच बनाने का विरोध किया और कहा कि बेंच को कोर्ट के बाहर चल रही राजनीति पर ध्यान नहीं देना चाहिए. अयोध्या से दिल्ली पहुंचे रामलला विराजमान की ओर से पक्षकार महंत धर्मदास ने दावा किया कि सभी सबूत, रिपोर्ट और भावनाएं मंदिर के पक्ष में हैं. हाईकोर्ट के फैसले में जमीन का बंटवारा किया गया है जो हमारे साथ उचित न्याय नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमारी कोर्ट में दलील होगी कि यहां ढांचे से पहले भी मंदिर था और जबरन यहां मस्जिद बनाई गई, लेकिन बाद में फिर मंदिर की तरह वहां राम लला की सेवा पूजा होती रही अब वहीं रामजन्मभूमि मंदिर है. लिहाजा हमारा दावा ही बनता है. कोर्ट सबूत और कानून से न्याय करता है और सबूत और कानून हमारे साथ है. यानी रामलला के जन्मस्थान पर सुप्रीम कोर्ट भी सबूतों और कानूनी प्रावधान पर ही न्याय करेगा.


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