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गंगा मां की गोद में मिला पीएम मोदी का बिछड़ा भाई, अपने काम से दे रहा प्रधानमंत्री को भी मात !

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वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो पद की शपथ लेते के साथ ही विकास के काम करने शुरू कर दिए. जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने वहां इतना विकास किया कि देशभर में उनके नाम का डंका बज गया था. साबरमती नदी की सफाई से लेकर अब गंगा नदी की सफाई के लिए भी उन्होंने कई ख़ास योजनाएं शुरू की हैं. लेकिन 60 साल के एक शख्स तो पिछले कई सालों से कुछ ऐसा काम कर रहा है कि लोगों ने उसे पीएम मोदी का बिछड़ा भाई कहना शुरू कर दिया है.


दरअसल 60 साल का ये व्यक्ति कुछ इस तरह से पीएम मोदी के गंगा मिशन को पवित्र कर रहा है कि देखकर अच्छे-अच्छे नौजवान भी हैरत में पड़ जाते हैं. इस काम में ना तो उसकी उम्र आड़े आ रही है और ना ही हैसियत. गंगा नदी के किनारे रहने वाले 60 साल के इस दिव्यांग व्यक्ति का नाम राजकुमार है और ये पिछले 15 वर्षों से गंगा के कचरे से घरों के सजावटी सामानों को बनाकर लोगों में स्वच्छता की जागरुकता फैला रहे हैं.

गंगा सफाई की उनकी इस लगन को देखकर लोगों ने उन्हें पीएम मोदी का बिछड़ा भाई कहना शुरू कर दिया है. राजकुमार अपने परिवार के साथ वाराणसी के अस्सी में भदैनी स्थित एक छोटे से कमरे में रहते हैं. रोज सुबह वो घाटों पर जा कर लोगों द्वारा फैलाये कचरे जैसे कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतले, शादियों के फेके हुए कार्ड, आइसक्रीम स्टिक, मिटटी के खराब बर्तन, कलश, आतिशबाजी के डिब्बे और पॉलीथीन इत्यादि को बीन कर घाटों की सफाई करते हैं और फिर इस कचरे को कहीं और फेकने की जगह वो इसे अपने घर ले जाते हैं और इससे बेहतरीन व् खूबसूरता गुलदस्ते, ग्रीटिंग कार्ड, सीनरी, बर्थ-डे गिफ्ट, सजावटी कैलेंडर, वॉल हैंगिंग इत्यादि बनाते हैं.


कचरे से बने उनके सामान इतने खूबसूरत होते हैं कि लोग उन्हें खरीद लेते हैं और इससे उनकी आजीविका भी चल जाती है. स्वच्छता की शिक्षा देने के साथ-साथ राजकुमार गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा भी देते हैं. जिसके कारण वो इलाके में मास्टर साहब के नाम से भी मशहूर हैं. बिना बिजली वाले एक छोटे से कमरे में रहने वाले राजकुमार गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए पिछले 15 वर्षों से बिना थके भगीरथ प्रयास कर रहे हैं.

उनकी स्वच्छता की इस मुहिम के बारे में घाट पर आने वाला लगभग हर व्यक्ति जनता है. यहां आने वाले पर्यटक भी राजकुमार के इस तरीके को देखकर आश्चर्य चकित हो जाते हैं. पर्यटक अक्सर कचरे से बानी उनकी चीजें खरीद कर अपने देश भी ले जाते हैं. राजकुमार के इस भागीरथ प्रयास की यहां के लोग तारीफ़ करते नहीं थकते.


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