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पूर्व RBI गवर्नर राजन ने किया एक और धमाकेदार खुलासा, लेटर बम से मुश्किल में फंसे मनमोहन, राहुल सोनिया के छूटे पसीने

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नई दिल्ली : भगोड़े देश छोड़कर भाग रहे थे और बैंक में NPA घोटालों के जवाब पर काफी लम्बे वक़्त से पूर्व RBI गवर्नर बचते फिर रहे थे. NPA वो क़र्ज़ होता है जिसे बैंक वसूल नहीं सकते हैं. कांग्रेस सरकार में ये क़र्ज़ करीब 11 लाख करोड़ का हो गया है. ऐसे में ये कैसे मुमकिन हो सकता है कि उच्च संस्थानों RBI और वित्तीय मंत्रालय को कुछ खबर ना हो, कोई मिलीभगत न हो.


PNB घोटालों के बाद से पर्दा खुला कि इसमें बैंकों ने भी खूब मोटा पैसा बनाया और क़र्ज़ में डूबे व्यापारियों को दोनों हाथों से करोड़ों रूपए लुटाकर विदेश भगाया गया. लेकिन जब मोदी सरकार ने सख्ती लगायी शिकंजा कसा तो रघुराम राजन बड़े खुलासे कर रहे हैं अब उन्होंने भगोड़ों का सीधा PMO से कनेक्शन को लेकर ज़ोरदार खुलासा कर दिया है.

राजन ने किया धमाकेदार खुलासा, पीएमओ को थी सब जानकारी

अभी मिल रही दैनिक जागरण मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराज राजन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गंभीर आरेाप लगाए हैं. राजन ने चिट्ठी में बताया अपने कार्यकाल में बड़े बकाएदारों,कर्जदारों की एक लिस्ट तत्‍कालीन पीएमओ को दे दी गयी थी, जिस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गयी और अब वे सब देश छोड़कर भाग गए हैं.

रघुराम राजन ने दावा किया कि जहां बैंकों ने इस दौरान नया कर्ज बांटने में लापरवाही बरती, वहीं कांग्रेस सरकार के दबाव में ऐसे लोगों को कर्ज देने का काम किया, जिनका कर्ज नहीं लौटाने का इतिहास रहा है. यह बैंकों की बड़ी गलती थी और देश में गंदे तरीके से कर्ज देने की शुरुआत थी.

ऐसे लोगों को क़र्ज़ दिया जिन्हे क़र्ज़ की ज़रूरत ही नहीं थी

राजन ने दावा किया कि इस दौर में कर्ज लेने वाले एक प्रमोटर ने उन्हें बताया कि बैंक ऐसे लोगों को भी कर्ज दे रहा था जिन्हें कर्ज की जरूरत नहीं थी और बैंक ने महज कंपनी से यह बताने के लिए कहा कि उसे कितने रुपयों का कर्ज चाहिए और वह कर्ज कंपनी को दे दिया गया. आम आदमी क़र्ज़ लेने के लिए अपनी चप्पल घिस देता है और उसे क़र्ज़ नहीं मिलता.

मनमोहन सिंह सरकार जिम्मेदार

राजन ने बैंकों के डूबे कर्ज यानि एनपीए के लिए मनमोहन सिंह सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। संसदीय समिति को भेजे अपने जवाब में राजन ने कहा, ‘’यूपीए-2 के शासन काल में 2006-08 के दौरान घोटालों की जांच में सुस्ती और पॉलिसी पैरालाइसिस के कारण बैंकों का डूबा कर्ज बढ़ता चला गया।‘

राजन ने दावा किया कि बैंकों के सामने सबसे ज्यादा बैड लोन ऐसे हैं जिन्हें 2006 से 2008 के बीच आवंटित किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह ऐसा समय था जब आर्थिक विकास दर बेहद अच्छी थी और बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देकर इस रफ्तार को बढ़ाने की जरूरत थी लेकिन ऐसी परिस्थिति में बैंकों को चाहिए था कि वह कर्ज देने से पहले यह सुनिश्चित करता कि जिन कंपनियों को वह कर्ज दे रहा है, उनका स्वास्थ्य अच्छा है और वह समय रहते अपने कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में हैं।

विदेश में मोदी सरकार ने भगोड़ों का किया जीना हराम

आज कोई 9 हज़ार करोड़, कोई 13 हज़ार करोड़ कोई 20 हज़ार करोड़ लेकर विदेश फरार चल रहा है. लेकिन मोदी सरकार ने भगोड़ा का कानून बनाया और इनकी देश में सारी संपत्ति हीरे, जवाहरात, बंगला, गाडी जब्त कर ली है. यही नहीं अभी भगोड़े मेहुल चौकसी ने एक वीडियो में बताया कि किस तरह मोदी सरकार ने उसका जीना हराम कर रखा है. यही नहीं उसने घड़ियाली आंसू भी बहाये और ED पर झूठा फंसने का भी इल्जाम लगाया.


जाहिर है रघुराम राजन ने यूपीए सरकार के उस झूठ का पर्दाफाश कर दिया है जिसमें कांग्रेस मोदी सरकार को एनपीए के लिए जिम्मेदार ठहरा रही थी। आपको बता दें कि मनमोहन सरकार में टूजी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ, कोल ब्लॉक आवंटन जैसे कई घोटाले हुए, लेकिन इन सब में सबसे बड़ा घोटाला NPA है।

यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी की सरपरस्ती में बैंकों पर दबाव बना कर कुछ बड़े उद्योपतियों को लाखों करोड़ का लोन दिलवाया गया। कांग्रेस और उनसे ताल्लुक रखने वाली कंपनियों के लूट का आलम यह था कि आजादी से लेकर वर्ष 2008 तक बैंकों ने 18 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए, जबकि 2008 से लेकर 2014 तक के बीच बैंकों ने 52 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए। यानि 6 साल में लगभग तीन गुना लोन बांटे गए.

मोदी सरकार द्वारा एनपीए वसूली के लिए शिकंजा कसा गया जिसके बाद 9 लाख 52 हजार करोड़ रुपये एनपीए में से 4 लाख करोड़ रुपये सिस्टम में वापस आ चुके हैं.

फोड़ा लेटर बम

गौरतलब है कि लोकलेखा समिति ने पूर्व गवर्नर से कमेटी के सामने पेश होने की अपील की थी और बैंकों के एनपीए पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। कमेटी ने राजन को अपना पक्ष पत्र के जरिए रखने की छूट दी थी, जिसके बाद पूर्व गर्वनर ने एनपीए पर लोकसभा समिति को जवाब दिया। समिति को लिखे पत्र गए में राजन ने एनपीए की समस्या के रहस्य से पर्दा उठाते हुए लिखा है कि देश के बैंक एक टाइम बम पर बैठे हैं और जल्द इस बम को निष्क्रिय नहीं किया गया तो इसे फटने से कोई रोक नहीं सकता।

राजन ने दावा किया जहां देश प्राइवेट बैंक ऐसी कंपनियों को कर्ज देने से कतराने लगे जहां पैसा डूबने का डर था लेकिन सरकारी बैंकों ने इससे कोई सीख नहीं ली और लगातार डिफॉल्टर कंपनियों को कर्ज देने का काम जारी रखा.

बता दें सबसे पहले पीएम मोदी ने इस समस्या को अच्छे से समझा था और बैंकों के NPA घोटाले को जनता के सामने रखा था. पीएम मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र में डूबे कर्ज (एनपीए) की भारी समस्या के लिये पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय ‘फोन पर कर्ज’ के रूप में हुए घोटाले को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि‘नामदारों’के इशारे पर बांटे गए कर्ज की एक-एक पाई वसूली की जाएगी.

उन्होंने कहा कि चार-पांच साल पहले तक बैंकों की अधिकांश पूंजी केवल एक परिवार के करीबी धनी लोगों के लिए आरक्षित रहती थी। आजादी के बाद से 2008 तक कुल 18 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए गए थे लेकिन उसके बाद के 6 वर्षों में यह आंकड़ा 52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

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