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अमेरिका में हुआ राहुल के साथ भयंकर हादसा, लोगों की छूटी ऐसी हंसी, देख शर्म से पानी-पानी हुए पप्पू

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नई दिल्ली : राहुल गांधी का मंगलवार को बर्कले यूनिवर्सिटी में प्रोग्राम था. इस दौरान राहुल ने काफी समझदारी पूर्वक कई मुद्दों पर बात करने की कोशिश की, लेकिन यहाँ भी वो अपना पोपट करा बैठे और लोगों ने खूब खिल्ली उड़ाई. दरअसल राहुल ने एक के बाद एक इतनी गलतियां की कि अमेरिका के प्रोगाम का फायदा होने की जगह उलटा नुक्सान ही हो गया और पूरी दुनिया के सामने राहुल की बेवकूफी का प्रदर्शन हो गया.


– फ्री स्पीच के पैरोकार राहुल के प्रोग्राम के दौरान एक महिला को सवाल पूछने से रोक दिया गया. लोगों ने कहा ये कैसी फ्री स्पीच है राहुल जी?

– राहुल ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी जैसे फैसले के लिए न तो चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर से सलाह ली और न ही संसद को कुछ बताया, इसके चलते देश का काफी नुकसान हुआ. इसे सुन वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए क्योंकि यदि राहुल के मुताबिक़ नोटबंदी सबको बताकर की जाती तो सारे नेता अपना कालाधन पहले ही सफ़ेद कर लेते, फिर फायदा क्या होता?

– राहुल ने कहा, “मैंने हिंसा के चलते अपने पिता को खोया, अपनी दादी को खोया। अगर ये सब मैं नहीं समझूंगा तो कौन समझेगा?” जिसपर लोग फिर चौंक पड़े क्योंकि सबसे ज्यादा हिंसा तो कांग्रेस सरकार के दौरान ही हुई है. इंदिरा ने देश पर इमरजेंसी लगाई, सिक्ख दंगे कांग्रेस ने करवाए, सबसे ज्यादा साम्प्रदायिक दंगे भी कांग्रेस के राज में ही हुए. कांग्रेस के राज में ही कश्मीरी पंडितों को हिंसा करके कश्मीर से विस्थापित कर दिया गया.

– राहुल ने कहा कि मोदी ने राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) को खत्म कर दिया है. ये बात सुनकर भी लोग चौंक पड़े क्योंकि देश में आरटीआई को बंद नहीं किया गया है, वो अभी भी वैसी ही चल रही है. आरटीआई से ही तो कांग्रेस को मोदी के सूट से लेकर विदेशी दौरों में खर्च होने वाले पैसों तक की जानकारी मिली है.

– राहुल ने कहा कांग्रेस अपनी पॉलिसीज और विजन को बातचीत से तय करती है, उसे वह थोपती नहीं है. इस पर वहां मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए क्योंकि इंदिरा ने इमरजेंसी थोपी ही तो थी, कांग्रेस हिन्दुओं पर सांप्रदायिक हिंसा कानून थोपने जा रही थी, जिसके मुताबिक़ सांप्रदायिक हिंसा केवल बहुसंख्यक वर्ग ही करता है.

– राहुल ने कहा कि वो 1984 के सिक्ख दंगापीड़ितों के साथ हैं और उनके हक के लिए लड़ते रहेंगे. हैरानी की बात है कि सिक्ख दंगों के एक भी कोंग्रेसी आरोपी को सजा नहीं हुई और उन्हें बचाने वाले कोंग्रेसी ही थे.

– राहुल ने कहा कि नफरत, गुस्सा और हिंसा हमें खत्म कर सकती है. पॉलिटिक्स का पोलराइजेशन (ध्रुवीकरण) खतरनाक है. जबकि सच तो ये है कि कांग्रेस ने आजतक अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति के सिवा कुछ और किया ही नहीं.


– राहुल ने कहा, “2012 के आसपास कांग्रेस पार्टी में घमंड आ गया और हमने लोगों से बात करना बंद कर दिया.” ये बात राहुल बोल रहे हैं, जिन्होंने तो खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पेश किया बिल सरेआम फाड़ दिया था. उन्होंने आजतक टीवी पर सिर्फ एक बार इंटरव्यू दिया है.

– राहुल ने कहा कि, “भारत में ज्यादातर वंशवाद चल रहा है. इसमें अखिलेश यादव, एमके स्टालिन, प्रेम कुमार धूमल के बेटे, अभिषेक बच्चन और मुकेश अंबानी का नाम ले सकते हैं. मैं चाहता हूं कि कांग्रेस में मेरे बाद ऐसा न हो.” क्यों आपके बाद, आपसे ही शुरुआत क्यों ना की जाए? वैसे आप के बाद वंशवाद चलेगा कैसे कांग्रेस में, क्योंकि आपने तो शादी की ही नहीं है?

– राहुल ने कहा कि, “कांग्रेस के शासनकाल की शुरुआत में कश्मीर में आतंकवाद बढ़ रहा था, लेकिन जब हमारा टेन्योर खत्म हो रहा था तो वहां शांति कायम हो गई. अब फिर से कश्मीर आतंकवाद की चपेट में है.” कांग्रेस अलगाववादियों को पाल रही थी, तो शान्ति तो रहनी ही थी. कांग्रेस सियाचिन ग्लेसिअर पाकिस्तान को सौंपने जा रही थी, जिसके कारण पूरा कश्मीर हाथ से निकल जाता.

– राहुल ने कहा कि, “पीएम मोदी ने कश्मीर में आतंकियों को जगह दी है। वहां तेजी से हिंसा बढ़ी है.” ये बात भी सरासर झूठ है क्योंकि पीएम मोदी ने तो सेना को आतंकियों को ठोकने के आदेश दिए हैं, वरना कांग्रेस तो उन्हें बिरयानी खिलाती थी.

– राहुल ने आखिरकार मान लिया कि मोदी उनसे कहीं ज्यादा बेहतर है. उन्होंने कहा कि, “मोदी में कुछ खास स्किल्स हैं, वो एक अच्छे कम्युनिकेटर है और इस मामले में मुझसे बेहतर हैं. उन्हें पता है कि लोगों तक किस तरह संदेश पहुंचाना है.”

– राहुल ने कहा कि, “मोदी अपने साथ काम कर रहे लोगों, अपने सांसदों से बात नहीं करते. ये बात उन्हें खुद बीजेपी के लोगों ने बताई है.” तो राहुल बाबा पूछ-पूछ कर काम कोंग्रेसी पीएम करते हैं वरना तो पीएम का काम ही होता है खुद फैसले लेने, मजबूत फैसले लेना.

बहरहाल अब अमेरिका को भी पता चल चुका है कि राहुल को पप्पू क्यों कहा जाता है.


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