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राष्ट्रपति ने लिया वो फैसला जिसका सभी को था इन्तजार, पाकिस्तान में आतंकियों में मची भगदड़

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नई दिल्ली : पाकिस्तान के खिलाफ पीएम मोदी की कूटनीति अपना काम कर रही है. भले ही बौखलाहट में पाकिस्तान एलओसी पर फायरिंग कर रहा है, मगर दुनियाभर के देशों की ओर से पड़ रहे दबाव के कारण पाकिस्तान अब टूटता जा रहा है. अमेरिका के फंडिंग रोक देने से पाकिस्तान पहले से ही हिला हुआ है. पीएम मोदी के प्रयासों से दुनियाभर में पाकिस्तान का पर्दाफ़ाश हो चुका है. ऐसे में अब मजबूरन पाक राष्ट्रपति ने एक बेहद सनसनीखेज फैसला लिया है.


पाकिस्तान में आतंकियों के बुरे दिन शुरू

पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों और लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा व तालिबान जैसे आतंकी संगठनों पर शिकंजा कसने वाले अध्यादेश पर दस्तखत कर दिए हैं. पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह अध्यादेश मुख्य रूप से आतंकवाद निरोधक अधिनियम (एटीए) की एक धारा में संशोधन करता है. इसके साथ ही यह पाकिस्तानी अधिकारियों को यूएनएससी द्वारा प्रतिबंधित किए गए लोगों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने एवं उनके कार्यालयों, बैंक खातों को सील करने का अधिकार देता है.

वैश्विक दबाव के सामने झुका पाकिस्तान

राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (एनएसीटीए) के सूत्रों ने इस कदम की पुष्टि की. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के गृह मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के साथ एनएसीटीए की आतंकवाद वित्त पोषण विरोधी (सीएफटी) इकाई इस मसले पर एक साथ मिलकर काम कर रही है.

दरअसल चारों ओर से पड़ रहे दबाव के सामने आखिर पाकिस्तान कब तक टिकता. हालांकि शुरू-शुरू में पाकिस्तान ने काफी कोशिश की, कि वो आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई एक्शन ना ले. मगर ऐसे तो पाकिस्तान के वजूद पर ही ख़तरा मंडराने लगा है. लिहाजा मजबूरन पाकिस्तान को इस अध्यादेश पर दस्तखत करने ही पड़े.


इन संगठनों को संरा सुरक्षा परिषद कर चुका है प्रतिबंधित

पाक राष्ट्रपति भवन के एक अधिकारी ने भी इस कदम की पुष्टि की. हालांकि उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि रक्षा मंत्रालय ही इसे अधिसूचित करेगा और इस पर जवाब देगा.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित सूची में अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाक, लश्कर-ए-झांगवी, जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ), लश्कर-ए-तैयबा सहित अन्य संगठन शामिल हैं.

हाफिज से जुड़े संगठनों पर भी कसेगी लगाम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में सरकार ने हाफिज सईद से जुड़े दो संगठनों जमात-उद-दावा और एफआईएफ पर नियंत्रण की योजना बनाई थी. बाद में ऐसा माना गया कि इस बारे में एक कार्ययोजना सौंपी गई है.

इस अध्यादेश के बाद हाफिज सईद और उसके संगठन पर शिकंजा कसने के लिए पाकिस्तान मजबूर हो जाएगा. पीएम मोदी की कूटनीति के चलते केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि अरब देशों के साथ भी भारत के सम्बन्ध और भी ज्यादा प्रगाढ़ हो रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान पर चारों ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है कि वो अपने नापाक इरादों की पूर्ती के लिए आतंकवाद का सहारा लेना अब बंद करे.


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