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पीएम मोदी को मिला राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सबसे बड़ा साथ, दिल्ली में सोनिया-राहुल की उड़ गई नींद !

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नई दिल्ली : देश में लगभग 60 वर्षों तक कांग्रेस का राज रहा. पीएम मोदी ने 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद देश में एक बदलाव की शुरुआत की. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देना शुरू किया. खबर आयी है कि पीएम मोदी की इस पहल को अब देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का साथ मिल गया है. आज से राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री व् मंत्री केवल हिन्दी भाषा में ही अपना भाषण देंगे.

अंग्रेजी नहीं आती तो मायूस ना होएं !

इस सम्बन्ध में आधिकारिक भाषाओं को लेकर बनी संसदीय समिति की सिफारिश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दे दी है. इस संसदीय समिति की सिफारिश के मुताबिक़ अगर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित सभी गणमान्य लोग हिंदी बोल व् पढ़ सकते हैं तो उन्हें हिंदी में ही भाषण देना चाहिए.

हालांकि पीएम मोदी तो पहले से अपने ज्यादातर भाषण हिंदी में ही देते हैं. साथ ही उनके मंत्रिमंडल के अधिकतर मंत्री भी अपने भाषण हिंदी में ही देते हैं. अब राष्ट्रपति को मंजूरी मिलने से देश की जनता के लिए गणमान्य लोगों के भाषण को समझना सरल हो जाएगा. अब से यदि हिंदी आती है तो गणमान्य व्यक्ति हिन्दी में ही अपना भाषण देंगे.


गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. यानी पूरी संभावना है कि अब जो भी अगला राष्ट्रपति बनेगा वो देश को हिन्दी में ही सम्बोधित करेगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस अधिसूचना को मंजूरी के लिए पीएमओ, सभी मंत्रियों और राज्यों को भेज दिया है.

एयर इंडिया के टिकटों पर हिंदी !

केवल इतना ही नहीं बल्कि राष्ट्रपति ने इसके साथ-साथ कई अन्य सिफारिशों को भी अपनी मंजूरी दी है. मंजूरी दी गयी अन्य सिफारिशों के अनुसार अब एयर इंडिया की टिकटों पर जानकारी हिंदी में लिखी जायेगी. हवाई जहाज में यात्रियों के लिए हिंदी अखबार और हिंदी मैगजीन भी उपलब्ध होंगी. केंद्र सरकार के कार्यालयों में अंग्रेजी की तुलना में हिंदी की पत्र-पत्रिकाओं और किताबों की ज्यादा खरीदारी करने की सिफारिश को भी राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति के आदेशों के अनुसार, अब सभी सरकारी और अर्द्ध-सरकारी कंपनियों और संगठनों को अपने उत्पादों के नाम हिंदी में बताने होंगे.

इसी के साथ सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालयों में आठवीं कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य विषय करने की सिफारिश को भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने से अब देश में हिन्दी की लोकप्रियता बढ़ाने की पीएम मोदी की मुहिम को बल मिलेगा. वहीँ देश की जनता भी अब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व् अन्य गणमान्य लोगों के भाषण को सरलता से समझ पाएगी.


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