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डीयू विवाद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के इस बयान को सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे, बौखलाए कई नेता

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नई दिल्ली : दिल्ली यूनिवर्सिटी में कथित देशविरोधी नारेबाजी के बाद छात्रों के बीच हाथापाई और लड़कियों से बदसलूकी के बाद से पूरा मुद्दा मीडिया पर छाया हुआ है. देशभर में इसकी चर्चा की जा रही है. अब इस मुद्दे पर खुद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बयान दिया है जिसके बाद से देश में एक नयी बहस चल पड़ी है.


दरअसल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर महिलाओं पर हुए हमले की निंदा की है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही स्वतंत्र विचार, अभिव्यक्ति और भाषण का गढ़ रहा है इसलिए अशांति और हिंसा की जगह छात्रों और शिक्षकों को तार्किक चर्चा और बहस करनी चाहिए. हालांकि इस दौरान उन्होंने कश्मीर की आजादी के नारे लगाने वाले छात्रों के विषय में कुछ नहीं कहा.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ये बयान केरल के कोच्चि में छठे केएस राजामणि मेमोरियल लेक्चर के दौरान दिया. उन्होंने छात्रों द्वारा की गयी हिंसा पर अपना दुःख भी प्रकट किया. उन्होंने कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार हमें संविधान से मिले सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से एक है. उनके इस बयान का जहां एक ओर कई नेताओं ने स्वागत किया है वहीँ कई नेताओं का कहना है कि माननीय राष्ट्रपति जी को देश के टुकड़े करने का सपना देखने वालों और कश्मीर को भारत से अलग करने के नारे लगाने वालों के बारे में कुछ कहना चाहिए था.


राष्ट्रपति के बयान के बाद से नया विवाद खड़ा हो गया है. कई नेताओं का कहना है कि अभी कुछ ही वक़्त पहले जब तारेक फतह जेएनयू में एक प्रोग्राम में गए थे तो उन्ही छात्रों ने तारेक फतह के साथ बदसलूकी की थी जिनका समर्थन माननीय राष्ट्रपति जी कर रहे हैं. इन नेताओं ने कहा कि वो भी हिंसा के खिलाफ हैं और किसी भी तरीके से इसे सही नहीं ठहराते लेकिन असहिष्णुता पर बोलने के साथ-साथ राष्ट्रपति जी को उन छात्रों पर भी कुछ कहना चाहिए था जो देश को तोड़ने की बात करते हैं.

आपको बता दें कि अपने भाषण में राष्ट्रपति मुखर्जी ने महिलाओं के प्रति हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि वो ऐसे किसी भी समाज को सभ्य नहीं मानते जहां महिलाओं के साथ खराब आचरण हो. जब हम किसी महिला के साथ बर्बर आचरण करते हैं तो स्वयं अपनी सभ्यता की आत्मा को ही घायल करते हैं. हमारा संविधान तो महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता ही है, इसके साथ-साथ हमारे देश की संस्कृति और परंपरा में भी महिलाओं को देवी माना जाता है.

जिसपर अब कई नेताओं का कहना है कि हाथापाई दोनों ही पक्षों की कुछ महिलाओं के साथ की गयी थी और वो कभी भी महिलाओं के अपमान का समर्थन नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के इस बयान से देश तोड़ने का सपना देखने वालों का मनोबल बढ़ेगा और पाकिस्तान भी उनके इस बयान का फायदा उठाएगा. इसके बाद खबर ये भी आयी कि पाकिस्तानी मीडिया ने गुरमेहर के “मेरे पापा को पाकिस्तान ने नहीं जंग ने मारा है” बयान को दिखा कर पाकिस्तान के फायदे के लिए इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है. इसके साथ ही पाक मीडिया में राष्ट्रपति जी के इस बयान को दिखा कर कहना शुरू कर दिया है कि कश्मीर की आजादी पर भारत को बात करनी चाहिए, भारत के राष्ट्रपति भी इसका समर्थन करते हैं.


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