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देश विरोधियों, वामपंथियों के खिलाफ राष्ट्रपति कोविंद का ऐलान, तुष्टिकरण करने वालों में पसरा मातम

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उत्तराखंड : 10 जनपथ से देश को चलाने वालों और खुद को देश का असली मालिक और सर्वे-सर्वा समझने वालों के मुँह पर महामहिम रामनाथ कोविंद ने करारा तमाचा लगाया है. फर्जी सेकुलरिज्म के नाम पर केवल एक वर्ग का तुष्टिकरण करने वालों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जोरदार झटका देते हुए कुछ ऐसा कहा है, जिसने कोंग्रेसियों और वामपंथियों की नींदें उड़ा दी हैं.


इंडिया गेट या लाल किला नहीं बल्कि साधु-संत हैं राष्ट्र की पहचान !

यहाँ दिव्य-प्रेम सेवा मिशन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि, “इस राष्ट्र ने गंगा व साधु-संतों के विचार-प्रभाव से अपना स्वरूप ग्रहण किया है और वही इस राष्ट्र की पहचान है, ना कि इंडिया गेट या लाल किला.”

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र निर्माण में सहभागी उन महापुरुषों का स्मरण किया जो दुनिया के सामने अपनी पहचान उजागर किए बिना निर्लिप्त भाव से देश सेवा कर रहे हैं. इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल केके पाल, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पतंजलि के बालकृष्ण महाराज भी मौजूद थे.

भारी बारिश में गंगा आरती की महामहिम ने !

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रपति कोविंद खुद भी दिव्य-प्रेम सेवा मिशन ट्रस्ट के सदस्य रहे हैं और राष्ट्रपति बनने के बाद वो पहली बार यहां आये हैं. कार्यक्रम से पहले भारी बारिश के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सबसे पहले नंगे पैर गंगा घाट गए और मां गंगा की आरती की. उनकी सादगी इसी बात से देखी जा सकती है कि इस दौरान उन्होंने बारिश से बचने के लिए छाता भी लेने से इनकार कर दिया.


वहीँ देश की जनता राष्ट्रपति कोविंद का कितना सम्मान करती है, ये भी इसी बात से साबित हो जाता है कि उनके भाषण के दौरान पंडाल के नीचे से बारिश का पानी बह रहा था, लेकिन उसकी परवाह ना करते हुए सभी राष्ट्रपति के विचारों को सुन रहे थे.

तुष्टिकरण करने वालों के युग का अंत !

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि, “युगों-युगों से इस राष्ट्र को पोषित करने में ऐसे महामनाओं ने काम किए हैं, जिन्होंने अपने को कभी सामने भी नहीं आने दिया. ऐसे महापुरुष ही राष्ट्र की असली ताकत रहे हैं.” दिव्य-प्रेम सेवा मिशन के संचालक आशीष गौतम, संयोजक संजय चतुर्वेदी ने राष्ट्रपति का स्वागत व अभिनंदन किया. इस दौरान देश भर से मिशन के हजारों कार्यकर्ता यहां पहुंचे हुए हैं.

महामहिम जी का ये बयान भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है. महामहिम जी के इस बयान का धर्मनिष्ठ और राष्ट्रवादियों के समूह में दिल खोल कर स्वागत हो रहा है और धर्मसंस्थापना के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. वहीँ तुष्टिकरण करने वालों के युग का अंत है.


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