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कश्मीर को लेकर आगबबूला हो गए मोदी, अलगाववादियों की उलटी गिनती शुरू, महबूबा के भी छूटे पसीने

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कश्मीर : घाटी में लगातार बढ़ती जा रही हिंसा और तनाव ने केंद्र सरकार के सामने धर्म संकट खड़ा कर दिया है. खुद पीएम मोदी भी कश्मीर के हालात को लेकर चिंता में भी हैं और कश्मीर में अलगाववादियों की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए बड़ा फैसला करने का मूड बना रहे हैं. हालाकि ये भी तय है कि उनके इस फैसले का वामपंथी दल व् कोंग्रेसी विरोध भी जरूर करेंगे.

कश्मीर में लग सकता है राष्ट्रपति शासन !

खबर है कि पीएम मोदी कश्मीर में राष्टपति शासन लगाने पर विचार कर रहे हैं. दरअसल कश्मीर को लेकर पीएम मोदी बेहद गंभीर हैं, इसी के चलते बुधवार को कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद पीएम ने बीजेपी कोर ग्रूप की बैठक बुलाई. लगभग 3 घंटों तक चली इस बैठक में कश्मीर के हालात पर चर्चा की गयी.

इस बैठक में जम्मू से बीजेपी नेता और केंद्र में मंत्री जितेंद्र सिंह के अलावा रक्षा और वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गड़करी, वैंकेया नायडू और पार्टी महामंत्री राम लाल भी शामिल थे.

बैठक में पीएम मोदी को घाटी के ताजा हालात से रूबरू कराया गया. हाल ही में कश्मीर के दौरे पर गए सेना प्रमुख का आंकलन, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से हुई उनकी बातचीत और खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बारे में भी पीएम मोदी को बताया गया. सूत्रों के हवाले से जो खबर आयी है, उसके मुताबिक़ सेना जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के रवैये से खासा नाराज है. ख़बरों के मुताबिक़ महबूबा मुफ्ती के स्टैंड से बीजेपी भी नाखुश है.


मोदी की छवि पड़ रही है कमजोर !

सूत्रों के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर बीजेपी के नेता भी महबूबा मुफ्ती के बर्ताव और काम करने के तरीके को लेकर बेहद नाखुश हैं. कश्मीर में जिस तरह से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, उसे देखते हुए बीजेपी नेतृत्व पीडीपी को सख्त रवैया दिखाने के मूड में है.

बीजेपी नेताओं का मानना है कि देश की जनता की पीएम मोदी से उम्मीद है कि वो घाटी में तनाव को दूर करेंगे लेकिन ऐसा ना हो पाने के कारण मोदी की छवि कमजोर पड़ रही है. लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए है कि क्या राज्य सरकार में बीजेपी की भागीदारी ने पीएम मोदी के हाथ बाँध दिए हैं?

इन सवालों के उठने के कारण बीजेपी के बड़े नेता अब महबूबा से नाता तोड़ने के मूड में नज़र आ रहे हैं, जिससे राज्य सरकार गिर जायेगी और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा कर सेना के हाथ खोले जा सकते हैं. वहीँ सूत्रों के मुताबिक़ हाल ही में हुए उपचुनाव में भी महबूबा मुफ्ती को मुँह की खानी पड़ी थी. उनकी मंशा तो अपने भाई को जिताकर केंद्र की राजनीति में पहुंचाने की थी, लेकिन ये हो ना सका क्युकी उनके भाई चुनाव हार गए.

महबूबा मुफ्ती चाहती थीं कि उनके भाई चुनाव जीत कर एनडीए का हिस्सा बन जाएँ, जिससे भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सके. बहरहाल उनके भाई की हार के बाद अब 23 अप्रैल को महबूबा मुफ्ती दिल्ली आ रही हैं. अप्रैल के अंत में बीजेपी अध्यक्ष भी दो दिन के जम्मू दौरे पर जाएंगे. तब तक राज्य सरकार ने यदि हालात को काबू में कर लिया तो ठीक वरना पीएम मोदी कश्मीर पर बड़ा फैसला लेते हुए पीडीपी से गठबंधन तोड़ते हुए वहां राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय ले सकते हैं.


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