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मोदी ने शुरू किया 5 लाख करोड़ का ऐसा मेगा प्लान, अमेरिका,रूस,जापान तक में नहीं हुआ कभी ऐसा

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नई दिल्ली : मोदी सरकार ने अब तक कई बड़े फैसले लिए हैं, लेकिन अब जो फैसला पीएम मोदी ने लिया वो इतना बेमिसाल और ऐतिहासिक है कि इसकी चर्चा दुनियाभर में की जा रही है. मोदी सरकार ने देश की सभी बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने के लिए 87 बिलियन डॉलर यानी करीब 5 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की शुरुआत की है. इस प्रोजेक्ट के ख़त्म होते ही देश को बाढ़ और सूखे से हमेशा के लिए निजात मिल जायेगी.

बता दें कि 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने देश की नदियों को जोड़े जाने का प्रस्ताव रखा था और इसके असर को जानने के लिए एक कार्यदल का गठन भी किया गया था. लेकिन 2004 में कांग्रेस सरकार सत्ता में आयी और इस प्रोजेक्ट को ठन्डे बास्ते में डाल दिया. इस दौरान लोग बाढ़ से और किसान सूखे से मरते रहे लेकिन सत्ताधारियों का ध्यान इस ओर नहीं गया.

अब मोदी सरकार ने 60 नदियों को आपस में जोड़ने के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी है. प्रोजेक्ट के पहले फेज को पीएम मोदी मंजूरी दे चुके हैं. इस प्रोएक्ट में गंगा समेत देश की 60 नदियों को जोड़ा जाएगा. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद किसानों की मानसून पर निर्भरता कम हो जाएगी और लाखों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी. सूखे के कारण किसानों की आत्महत्या की नौबत नहीं आएगी.


पिछले दो सालों से मानसून ने भी कहर ढाया हुआ है, भारत के कई हिस्सों समेत बांग्लादेश और नेपाल में बाढ़ के कारण भारी जान-माल का नुक्सान हुआ है. बताया जा रहा है कि नदियों को जोड़ने से ना केवल बाढ़ से राहत मिलेगी बल्कि हजारों मेगावॉट बिजली भी पैदा होगी.

क्या होगा पहले फेज में ?

केन नदी पर एक बाँध बनाया जाएगा और 22 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए केन को बेतवा से जोड़ा जाएगा. केन और बेतवा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के एक बड़े इलाके को कवर करती हैं. इसके अलावा सरकार पार-तापी को नर्मदा और दमन गंगा के साथ जोड़ने की भी तैयारी कर रही है. इस प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों के मुताबिक़ ज्यादा पानी वाली नदियों जैसे गंगा, गोदावरी और महानदी को अन्य नदियों से जोड़ा जाएगा. इसके लिए इन नदियों पर बाँध बनाए जाएंगे और नहरों द्वारा अन्य नदियों से जोड़ दिया जाएगा. बाढ़ और सूखे की समस्या से निजात पाने का यही एकमात्र रास्ता है.

2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने नदी जोड़ प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा था. बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने की व्यावहारिकता परखने के लिए एक कार्यदल का गठन भी किया गया था. प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में पूरा करने की सिफारिश की गई थी. पहले हिस्से में दक्षिण भारतीय नदियों को जोड़कर 16 कड़ियों की एक ग्रिड बनाई जानी थी और दुसरे हिस्से में हिमालयी हिस्से के तहत गंगा, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों को आपस में जोड़ने की योजना बनाई गई थी. लेकिन कांग्रेस सरकार के आने पर इस प्रोजेक्ट पर काम रुक गया.


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