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कश्मीर में हुआ बेहद सनसनीखेज खुलासा, खुफिया एजेंसियों के साथ-साथ पीएम मोदी के भी उड़े होश !

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नई दिल्ली : पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों की ह्त्या और उसके बाद उनके शवों के साथ बर्बरता के बाद से भारत-पाक सीमा पर भारी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. लेकिन सीमा पर तनाव के बीच खुफिया एजेंसियों ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसे देख भारत सरकार की आँखें फटी रह गयी हैं.


कारोबार के नाम पर विश्वासघात!

इस खुलासे के मुताबिक़ कश्मीर सीमा पर पाकिस्तान के साथ हो रहे व्यापार के जरिए पाकिस्तान हथियार और गोला-बारूद भी भारत पहुंचा रहा है. दरअसल आपसी विश्वास बहाल करने के नाम पर कांग्रेस सरकार ने 2008 में जम्मू और कश्मीर में एलओसी पर कुछ सामान के ड्यूटी-फ्री ट्रेड की अनुमति दे दी थी. इसके साथ ही यहाँ पाकिस्तान के साथ कारोबार बार्टर सिस्टम यानी अदला-बदली के जरिए किये जाने को भी इजाजत मिली हुई है. बस इसी आड़ में बड़ा गोरख धंधा चल रहा है.

सबसे हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तान से सामान लेकर जो ट्रक भारत की सीमा में प्रवेश करते हैं, उनके कंटेनरों की जांच में लापरवाही बरती जा रही है. सही तरीके से जांच के लिए स्कैनर खरीदे जाने थे, लेकिन मनमोहन सरकार 6 साल में स्कैनर नहीं खरीद पाई. हैरानी की बात तो ये है कि मोदी सरकार आने के बावजूद भी पिछले तीन सालों से फाइलें वित्त और गृह मंत्रालयों के बीच यहां से वहां घूम रही है. देश की सुरक्षा के लिए इतने अहम सामान की खरीद की जगह गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जैटली का ध्यान पता नहीं किधर है.

कारोबार के नाम पर हथियारों की तस्करी !

अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसी एनआईए को इस कारोबार की आड़ में अवैध हथियार पाकिस्तान से भारत आने के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने एक ट्रक में हथियारों की एक बड़ी खेप पकड़ी भी थी. अब जांच की जा रही है कि कहीं इस रास्ते का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए सीमापार से हथियारों के साथ-साथ नकली नोट भेजने के लिए तो नहीं किया जा रहा है.

दरअसल आपसी व्यापार के लिए सलामाबाद और चक्कन-दा-बाग में दो ट्रेड फसिलिटेशन सेंटर का निर्माण किया गया था. व्यापार के जरिये कश्मीर में बनने वाली वस्तुओं व् उत्पादों को पाकिस्तान भेजा जाता है और पाकिस्तान से वहां बनने वाले उत्पादों को कश्मीर लाया जाता है. पूरा का पूरा व्यापार बार्टर यानी अदला-बदली के जरिये किया जाता है. इसका मतलब जितने किलो सामान भेजा जाता है, उतने ही किलो सामान भारत आता है.


शुरू-शुरू में ड्यूटी फ्री इन सामानों में कपड़ा, फल, शॉल और दुपट्टे जैसी चीजें शामिल थीं लेकिन बाद में इनमें मेवों व् कुछ अन्य वस्तुओं को भी शामिल कर लिया गया. जानकारी के मुताबिक़ वजन तौलने वाले सिस्टम में खामियां हैं और इसी बात का फायदा उठाकर पाकिस्तान से हथियार और गोला-बारूद कश्मीर भेजा जा रहा है.

आखिर क्यों चल रहा है आदिमानव के जमाने का बार्टर सिस्टम ?

बार्टर सिस्टम की आड़ में पूरा गोरख धंधा चलाया जा रहा है, उदाहरण के लिए, बार्टर सिस्टम के तहत बादाम से भरे एक ट्रक को जीरे, संतरे या केले से भरे एक ट्रक के बराबर माना जा सकता है. हालांकि बादाम की कीमत तो बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में कश्मीर से बादाम से भरा ट्रक पाकिस्तान भेजा जाए और पाक्सितान से उसके बदले जीरे के ट्रक में बंदूकें और गोला-बारूद छिपाकर भेजा जाए.

इस तरह से सामान की कीमत में जो अंतर आता है, उसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा है. जांच में ये भी सामने आया है कि दिखाने के लिए ये पूरा कारोबार करी 600 फर्मों के जरिए से किया जाता है, लेकिन हकीकत में इनमे से ज्यादातर फर्म फर्जी है और दो-चार लोग ही फर्जी फर्म के नाम पर पूरा गोरख धंधा चला रहे हैं. ये खुलासा होने के बाद अब इस कारोबार के तरीके पर ही सवाल खड़ा हो गया है.

2008 में जब कांग्रेस सरकार ने इसकी शुरुआत की थी, तब तय ये हुआ था कि रक्षा मंत्रालय पाकिस्तान से आने वाले कंटेनरों की जांच के लिए स्कैनर उपलब्ध कराएगा. लेकिन वो स्कैनर कभी खरीदे ही नहीं गए. सूत्रों के हवाले से आयी खबर के मुताबिक़ अब इतने बड़े खुलासे होने के बाद पीएम मोदी इस कारोबार पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, इसे बंद भी किया जा सकता है. बहरहाल वित्तमंत्री, रक्षामंत्री और गृहमंत्री की इतनी बड़ी लापरवाही को लेकर सभी हैरान हैं.


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