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अभी-अभी : भारत के हाथ लगी पाकिस्तान के गले की नस, बिलबिला उठी पाक फ़ौज, सन्न रह गए नवाज

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नई दिल्ली : भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा करके पाकिस्तान की आर्मी अदालत ने मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने जाधव की मौत की सजा पर रोक तो लगा दी, लेकिन फिर भी पाकिस्तान अड़ा हुआ था. लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, उसने पाकिस्तान को अंदर तक हिला के रख दिया.

कुछ नहीं होगा कुलभूषण को, कैद में है पाकिस्तानी जासूस

खबर है कि पाकिस्तानी सेना का एक सीनियर अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब ज़हीर अप्रैल महीने से ही लापता है. पाकिस्तान में उसकी तालाश जारी थी लेकिन अब पाकिस्तान सरकार ने चिट्ठी लिखकर भारत सरकार से अपने अफसर की खोज-खबर के बारे में पूछा है.

दरअसल पाक सेना को और पाकिस्तान की सरकार को संदेह है कि भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उनके सीनियर अधिकारी को नेपाल से उठवा लिया है. बताया जा रहा है कि ये पाक अधिकारी आईएसआई के मिशन पर नेपाल आया हुआ था और इसका मिशन था, भारत में मौजूद पाकिस्तानी आतंकियों तक आर्थिक मदद पहुँचाना. हालांकि इस बारे में भारत सरकार औपचारिक तौर पर यही कहती रही है कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.

लेकिन पाक मीडिया में बताया जा रहा है कि जिस तरह पाकिस्तान ने ईरान से कुलभूषण जाधव को अगवा कर लिया था, उसी का बदला लेने के लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों ने नेपाल से हबीब ज़हीर को उठवा लिया, ताकि पाकिस्तान कुलभूषण का बाल भी बांका ना कर सके.

क्या है अंदर की खबर?

खबर है कि ये पाकिस्तानी अफसर नेपाल में अपने कुछ जासूसों से मिलने आया था. भारतीय खुफिया एजेंसियों को वक़्त रहते इसकी भनक लग गई और उन्होंने नेपाल बॉर्डर के पास के एक इलाके से इसे उठवा लिया. इस ऑपरेशन के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का दिमाग बताया जा रहा है. “कांटे से ही काँटा निकलता है” के सिद्धांत के अनुसार भारतीय खुफिया एजेंसियों ने भी इस पाक जासूस को उठवा लिया.

अपने टॉप जासूसी अफसर के पकडे जाने से पाक सेना के अधिकारियों समेत आईएसआई भी अंदर तक हिल गयी है. आनन-फानन में उन्होंने अपने यहाँ कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के लिए सज़ा ए मौत का एलान कर दिया, ताकि बैकडोर से भारत के साथ सौदेबाजी कर सके और कुलभूषण जाधव के बदले में अपने जासूस की जान बचा ले. लेकिन भारत ने तो उलटा दांव चलते हुए कुलभूषण मामले में अंतर्राष्ट्रीय अदालत में अपील कर दी और अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला भी सुना दिया.

अब पाकिस्तान की स्थिति खराब हो गयी, एक ओर तो वो अब कुलभूषण जाधव को सजा भी नहीं दे सकता और अपने जासूस को छुड़वाने का उसके सामने कोई रास्ता भी नहीं बचा. वहीँ लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब के परिवार के मुताबिक़ तो वो कारोबार के सिलसिले में नेपाल गए थे. उन्होंने बताया कि कर्नल हबीब ने नेपाल पहुंचने के बाद एक सेल्फी के साथ मैसेज भेजा था कि वो सेफ हैं.


उनके परिवार के मुताबिक़ नेपाल जाने के लिए हबीब ने लाहौर से काठमांडू के लिए फ्लाइट ली थी. इसके बाद वो भारतीय सीमा के पास बुद्ध जन्मस्थली लुबंनी गए थे. उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है. पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट के जरिये से अपने जासूस लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब के अगवा होने की जानकारी भी दी.

हालांकि भारत सरकार ने इस पूरे मामले में चुप्पी साधे रखी, आखिरकार थक-हार के लगभग डेढ़ महीने बाद पाकिस्तान सरकार को खुद ही पूछना पड़ा है कि कहीं भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उनके लेफ्टिनेंट कर्नल को गिरफ्तार तो नहीं कर लिया.

कैसे बिछाया गया जाल ?

पाक फ़ौज ने पिछले एक महीने से अगवा उसके जासूस की तलाश में जमीन-आसमान एक कर रखा है. जानकारी के मुताबिक़ जब लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब आईएसआई के मिशन पर काम कर रहा था, तब उसे नेपाल तक लाने के लिए खुफिया एजेंसियों ने बाकायदा जाल बिछाया, जिसमे वो फंस गया.

एक सुनियोजित योजना के तहत उसे यूएन की किसी नौकरी का ऑफर ईमेल के जरिए भेजा गया. इसी जॉब ऑफर के सिलसिले में लंदन में रहने वाले मार्क थॉमसन नाम के एक अज्ञात शख्स ने फोन पर उसके बात भी की थी. बाद में जांच के दौरान लंदन का वो नंबर फर्जी पाया गया. काठमांडू में पाकिस्तानी दूतावास की मानें तो हबीब ने यूएन के इस जॉब ऑफर के लिए एक वेबसाइट के जरिए आवेदन किया था, लेकिन उसके गायब होने के बाद से ही वो वेबसाइट और उसका ट्विटर हैंडल भी बंद हो चुके हैं.

देखिये पाक मीडिया का वीडियो

जिन-जिन फ़ोन नंबरों से हबीब ने बात की थी, वो सभी फर्जी निकले और अभी बंद हैं. पाकिस्तानी एजेंसियों ने सके पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ होने का शक जताया है.


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