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राजस्थान ख़ुफ़िया एजेंसियों का खुलासा, मज़ार की आड़ में देखिये क्या हो रहा था, होश उड़ा देगी ये खबर आपके

जयपुर : पाकिस्तान भले ही कितने दावे करता हो कि वो आतंकवाद से लड़ने के कदम उठा रहा है, वो किसी आतंकवादी संगठन के आतंकियों को पनाह नहीं देता है. लेकिन फिर भी आये दिन पाकिस्तान की नापाक साज़िश सामने आ ही जाती है. ताज़ा मामला राजस्थान से हैं यहाँ ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसा लगा है जिसने सभी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के पैरों तले जमीन हिला दी है.

पकडे गए आइएसआइ के जासूस ने किया बड़ा खुलासा

अभी अभी बड़ी खबर राजस्थान से आ रही हैं जहाँ पर ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कुछ वक़्त पहले ही पाकिस्तान की एजेंसी आइएसआइ के जासूस दीना खान को आतंकियों के सम्पर्क करते हुए पकड़ा था. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार दीना खान ने बताया कि पाकिस्तान ने अब आतंकियों को पैसा मुहैया कराने के लिए नया तरीका निकाला है.राजस्थान पुलिस की खूफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैडलर्स दरगाहों से प्राप्त चंदे में मिल रही बड़ी राशि को आतंकियों को मुहैया करा रहे थे.पाकिस्तान इस पैसे का इस्तेमाल भारत के बॉर्डर से सटे गांवों में आतंक फैलाने के लिए करता है. राजस्थान के मजारों की जिन दान पेटियों में श्रद्धालु दान देते हैं, उस पैसों को आतंकियों में बाँट दिया जाता था.

लाखों रुपयों आ रहे थे दान पेटी में, मजार का इंचार्ज था पाकिस्तानी जासूस दीना खान

राजस्थान की पुलिस ने दीना खान को पिछले हफ्ते ही बाड़मेर जिले के एक दूरदराज के गांव से गिरफ्तार किया था. पूछताछ में उसने यह भी खुलासा किया कि वो खुद एक बाड़मेर जिले के एक गांव की छोटी मजार का इन-चार्ज था. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि दीना खान ने मजार में दान से 3.5 लाख रुपये जुटाए थे , जिसे इसने और ISI के हैंडलर्स को भेज दिए.मजारों का इस्तेमाल अब एक बड़े आतंकी नेटवर्क को फंडिंग और आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है.

मजारों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है

आगे दीना खान ने बताया कि वो लगातार पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर्स के लगातार संपर्क में था और उनसे फोन पर बात करता था. कुछ वक़्त पहले जासूस हाजी खान को भी गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस को आशंका है कि ISI ने अपनी आतंकी के लिए फंड जुटाने के मकसद से बॉर्डर के इलाकों के अनेकों मजारों में दान पेटियां का इस्तेमाल हो रहा होगा.अगर हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता तो पुलिस की नज़र में आ जाते और पकडे जाते. ऐसे में मजारों की दान पेटी का नापाक इस्तेमाल करना
ज़्यादा आसान था. अब सभी सुरक्षा एजेंसियों चैकन्नी हो गयी है और अब सिर्फ इन जैसे स्थलों पर ही पूरी निगरानी रक्खी जाएगी.

आतंकवादियों के पास से मिलते थे डॉयफ्रुइट्स, और महंगे कपडे लत्ते

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक जब भी सेना किसी आतंकवादी को मार गिरती थी तभी उसके पास से मेहेंगे ढेर सारे डॉयफ्रुइट्स, और खाने के महंगे आइटम, खतरनाक हथियार AK 47 , ग्रेनेड्स, महंगे कपडे ये सब इन्हे इसी तरह की दान पेटियों के पैसों से मुहैया कराया जाता रहा है. और फिर ये सब हमारे देश के जवानों और मासूम लोगों को मारने में इस्तेमाल में लाया करते है.

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