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पाक ने भारत के खिलाफ उठाया बड़ा कदम तो मोदी ने लिया ऐसा सनसनाता हुआ फैसला, सन्न रह गया ना’पाक

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नई दिल्ली : भारत से कश्मीर हथिया लेने की पाकिस्तान की कोशिशों को हर बार बड़ा झटका लगता है लेकिन पाकिस्तान है कि मानता ही नहीं. एलओसी पर भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी की है. उसे लगा कि रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी करके वो भारत से शायद एक दिन जीत जाएगा लेकिन उसके सपने एक बार फिर से चकनाचूर हो गए हैं.

पाकिस्तान ने 7 फीसदी बढ़ाया रक्षा बजट

दरअसल पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट को लगभग सात फीसदी बढ़ाकर उसे 920 अरब रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने नेशनल असेंबली में वित्त वर्ष 2017-18 का संघीय बजट पेश करते हुए बताया कि पाकिस्तान ने रक्षा बजट 860 अरब रुपये से बढ़ाकर 920 अरब रुपये कर दिया है.

इसके अलावा तीन साल पहले शुरू किए जर्ब ए अज्ब अभियान के दौरान आतंकियों को परास्त करने में योगदान देने के लिए सशस्त्र बलों के लिए विशेष भत्ते को दस फ़ीसदी बढ़ाने की भी घोषणा की गयी है. पाकिस्तान ने ये फैसले तब लिए हैं जब पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव, कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंक, पाकिस्तान से आतंकियों का एलओसी पार करके भारत में घुसपैठ कर हमलों को अंजाम देना, पीओके से गुजरने वाले चीन समर्थित आर्थिक गिलयारे को लेकर भारत-पाक के बीच तनाव बढ़ा है.

पीएम मोदी ने मारा नहले पर दहला

वहीँ पीएम मोदी के एक फैसले से पाकिस्तान के शेखचिल्ली के सपने तबाह हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा फैसला लेते हुए भारत की रक्षा के लिये हथियारों का निर्माण भारत में बड़े स्तर पर करने का फैसला लिया है. कैबिनेट द्वारा पीएम मोदी के इस फैसले पर मुहर लगा दी गयी है. ऐसे में एक ओर तो देश की सुरक्षा के लिये दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम हो जाएगी, वहीँ दूसरी ओर मेक इन इंडिया के तहत काफी कम कीमत में, अच्छी तकनीक और जरूरत के मुताबिक वही हथियार बन जाएंगे. देश का पैसा देश में ही रहेगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी यानी एक तीर से कई शिकार.

पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगा दी गयी. इस फैसले से ठीक पहले रक्षा मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में भी इस फैसले को मंजूरी दी गयी थी. रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि रक्षा तैयारियों के तहत यह बेहद महत्वपूर्ण होता है कि रक्षा उपकरणों को घरेलू बाजार और उद्योग से ही खरीदा जाये. उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि इस मॉडल के तहत रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मिलकर काम करेंगे.

इस मॉडल के लागू होने से अब पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर बनाने के लिए देश की ही निजी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. ये कंपनियां विदेशी प्रतिष्ठानों के साथ नियमानुसार भागीदारी कर रक्षा उपकरणों को भारत में ही बना सकेंगी.

इस नीति से मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा मिलेगा और इसके साथ-साथ स्वदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और छोटे उद्योगों की सहायता से भारत में रक्षा उपकरण उत्पादन का माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी. यानी काम कीमत पर बेहद उन्नत हथियार भी देश में बनेंगे, भ्रष्टाचार व् कमीशनखोरी की संभावना भी ना के बराबर होगी और देश का पैसा देश में ही रहेगा. पाकिस्तान के नापाक सपनों के लिए इससे अच्छा जवाब कोई और नहीं हो सकता.

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