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मोदी का जबरदस्त कमाल, लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा समेत हाफ़िज़ सईद का खेल सदा के लिए ख़त्म

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नई दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी ने भले ही पाकिस्तान के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान ना किया हो, लेकिन उसके शैतानी इरादों को ध्वस्त करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कई बड़े कदम उठाये हैं. पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया गया है, उसकी आर्थिक सहायता भी बंद हो चुकी है. पाकिस्तान जैसे कंगाल देश को यदि आर्थिक सहायता मिलनी बंद हो गयी तो ज्यादा दिनों तक वो टिक नहीं पायेगा. ऐसे में पाकिस्तान ने पीएम मोदी के सामने घुटने तक दिए हैं.


हाफ़िज़ का जमात उद दावा आतंकी संगठन घोषित

अमेरिका की आर्थिक सहायता के बिना पाकिस्तान बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है. भुखमरी जैसी हालत से अपने देश को बचाने के लिए पाकिस्तान ने भारत के सबसे बड़े दुश्मन हाफिज सईद को बड़ा झटका दिया है.

भारत पर कई बार आतंकी हमले करवा चुका हाफिज सईद अब ज्यादा फड़फड़ा नहीं पायेगा. पाकिस्तान ने हाफ़िज़ के संगठन जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. पाकिस्तान आखिरकार दुनियाभर के दबाव के सामने झुक ही गया. पीएम मोदी की कूटनीति काम कर रही है और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है. पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ इतिहास में पहली बार इतना बड़ा कदम उठाया है.

मोदी की कूटनीति के सामने झुका पाक

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने अंतर्राष्ट्रीय दबाव के सामने झुकते हुए एक ऐसे अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए हैं जिसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों और लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा तथा तालिबान जैसे संगठनों पर लगाम लगाना है. इस सूची में हाफिज सईद का संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) भी शामिल है.

अब तक पाकिस्तान जमात उद दावा जैसे संगठनों को बस आतंकी सूची में रखकर काम चला रहा था. कभी प्रतिबंध की बात करता था तो कभी उस पर आर्थिक तौर पर चंदा न लेने के लिए प्रतिबंध की बात करता था. लेकिन राष्‍ट्रपति द्वारा अध्‍यादेश पर हस्‍ताक्षर के बाद जमात उद दावा घोषित तौर पर आतंकी संगठन हो गया है.

अध्यादेश को क़ानून में बदलेगा पाकिस्तान?

इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि पेरिस में फाइनेंसियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक होने वाली है, जिसमें मनी लॉन्डरिंग जैसे मामलों को लेकर अलग-अलग देशों की निगरानी होती है.


पाकिस्तान इस बैठक से पहले ख़ुद को पाक साफ़ दिखाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ये भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान का यह क़दम आंख में धूल झोंकने की कोशिश हो सकता है क्योंकि अध्‍यादेश कुछ समय बाद लैप्स कर सकता है क्‍योंकि उसकी अपनी समय सीमा होती है. लेकिन अगर पाकिस्‍तान उसे क़ानून में नहीं बदलता है तो फिर ये कुछ क्षणों के लिए आंख में धूल झोंकने जैसी बात होगी.

सवाल यह भी है कि पाकिस्तान में आम चुनाव के पहले क्या कोई भी सरकार जमात-उद-दावा जैसे संगठन से पंगा लेगी जिसकी पैठ पूरे पंजाब में है. ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार अध्यादेश आतंकवाद निरोधक अधिनियम (एटीए) की एक धारा में संशोधन करता है और अधिकारियों को यूएनएससी द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने, उनके कार्यालयों तथा बैंक खातों को सील किए जाने का अधिकार प्रदान करता है.

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (एनएसीटीए) ने इस नए कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि गृह मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के साथ-साथ एनएसीटीए की आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी (सीएफटी) इकाई इस मामले पर एक साथ मिलकर काम कर रही है.

राष्ट्रपति भवन में एक अधिकारी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि कानून है लेकिन उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार करते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय अधिसूचित प्राधिकरण है. अधिकारी ने कहा, ‘संबंधित मंत्रालय इसे अधिसूचित करेगा और इस पर प्रतिक्रिया देगा.’

ये बात तो साफ़ है कि पाकिस्तान पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है. पीएम मोदी अपनी कूटनीति के जरिये पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने में कामयाब हो गए हैं. यहाँ खासतौर पर ये बात गौर करने वाली है कि पाकिस्तान ने इससे पहले कभी ऐसा कदम नहीं उठाया था. आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान की ऐसी दयनीय हालत केवल 4 वर्षों के मोदीराज में हो चुकी है. आने वाले वक़्त में पाकिस्तान का टूटना भी तय माना जा रहा है.


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