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केजरीवाल और कांग्रेस को नितीश कुमार का बड़ा झटका, केजरीवाल, राहुल के छूटे पसीने

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नई दिल्ली : बिहार में परेशान चल रहे नितीश कुमार अब कुछ बड़ा करने की तैयारी में नज़र आ रहे हैं. आरजेडी के कुछ विधायकों ने पिछले कुछ वक़्त से बिहार में लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की मांग छेड़ी हुई है. लालू और राबड़ी ने तो मजाक-मजाक में नितीश को बूढा तक कह दिया है. लेकिन इन सबसे बेपरवाह नितीश अब केजरीवाल को बड़ा झटका देने जा रहे हैं.


दरअसल दिल्ली में निकाय चुनाव होने वाले हैं और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पहली बार इसमें अपनी किस्मत आजमाने जा रही है. दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कुल 272 सीटें हैं जिनपर फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस का कब्जा है. दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव को केजरीवाल सरकार के लिए जनमत संग्रह के रूप में भी देखा जाएगा, क्योंकि इससे उनकी सरकार के बारे में दिल्ली की जनता की राय पता चलेगी. यही वजह है कि ये चुनाव केजरीवाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

निकाय चुनाव में नितीश की केजरीवाल से टक्कर

लेकिन नितीश की पार्टी जेडीयू ने भी इस चुनाव में सभी 272 सीटों पर चुनाव लड़ने की ऐलान कर दिया है. जिससे केजरीवाल बड़ी मुश्किल में पड़ गए हैं क्योंकि दिल्ली में बिहार और यूपी के लोगों की अच्छी-खासी तादाद है. सूत्रों के मुताबिक़ दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों की संख्या 40 फीसदी के करीब है. पूर्वांचल के लोग नितीश कुमार को काफी पसंद करते हैं ऐसे में केजरीवाल के लिए इस चुनाव में अच्छा प्रदशन करना बेहद मुश्किल हो गया है.


पूर्वांचल के लोगों पर तो बीजेपी की भी नजर है, इसलिए दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष का पद सांसद मनोज तिवारी को सौंपा गया है. मनोज तिवारी एक लोकप्रिय भोजपुरी गायक और अभिनेता हैं और पूर्वांचल के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. इसके अलावा भोजपुरी सिनेमा के अमिताभ बच्चन कहलाये जानेवाले सुपरस्टार रवि किशन भी कांग्रेस को छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. मनोज तिवारी और रवि किशन दोनों मिलकर बीजेपी के प्रचार के लिए उतर सकते हैं. ऐसे में बीजेपी की जीत की संभावना काफी बढ़ गयी है.

केवल इतना ही नहीं बल्कि केजरीवाल के परम विरोधी कहलाये जाने वाले योगेंद्र यादव भी अपनी पार्टी स्वराज इंडिया के साथ इस चुनाव में उतरने वाले हैं. केजरीवाल से अपना पुराना हिसाब चुकता करने के लिए योगेंद्र यादव भी इस चुनाव में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले हैं. दिल्ली की जनता भी केजरीवाल से काफी त्रस्त हो चुकी है, ऐसे में केजरीवाल के लिए इस चुनाव में अपनी विजय पताका फहरान बेहद मुश्किल हो गया है.


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