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बिहार में फिर होगी पीने वालों की मौज, नितीश सरकार के बड़े फैसले से ख़ुशी से झूम उठे तडियल !

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पटना : पिछले साल अप्रैल महीने में नितीश कुमार के बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के बाद राज्य सरकार ने ताड़ के उत्पाद ताड़ी की जगह नीरा सहित अन्य उत्पादों का उत्पादन शुरू किए जाने की घोषणा की थी. ताड़ी पीने के शौकीनों को अब बिहार सरकार अगले महीने से ‘नीरा’ पिलाने जा रही है.

नितीश पिलायेंगे नीरा !

दरअसल नितीश सरकार अब ताड़ और खजूर से निकलने वाले पेय पदार्थो को ‘नीरा’ के रूप में पेश करने जा रही है. अगले महीने से बिहार में ‘नीरा’ उत्पादन का काम शुरू हो जाएगा और अगले महीने से ही नीरा की बिक्री भी शुरू हो जायेगी.

तड़ियलों की बल्ले-बल्ले !

नीरा उत्पादन के लिए नितीश सरकार ने 12 जिलों में उत्पादक समूहों का गठन किया है. इसके अलावा नीरा का उत्पादन सुचारु तरीके से चल सके इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना पर भी मंजूरी दे दी है. बिहार के गया, नवादा, नालंदा, बांका, भागलपुर, समस्तीपुर, पटना, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण और जहानाबाद जैसे लगभग एक दर्जन जिलों में नीरा उत्पादन योजना की जिम्मेदारी ‘जीविका’ नाम के संगठन के हाथों में दी है.

बताया जाता है कि बिहार के इन जिलों में सबसे ज्यादा ताड़ के पेड़ हैं. ख़बरों के मुताबिक़ बिहार में ताड़ के तकरीबन 92 लाख पेड़ हैं, वहीँ खजूर के भी लगभग 40 लाख पेड़ बिहार में हैं. सरकार के मुताबिक़ ताड़ी हानिकारक होती है, जबकि नीरा पौष्टिक होता है और स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है.

ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस को नीरा कहते है. इसमें खनिज लवण, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, विटामिन ए, बी और सी की काफी मात्रा होती हैं. नीरा के लिए कहा जाता है कि ये पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.


गुड़ तथा अन्य उत्पाद भी बनेंगे !

बिहार सरकार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक नीरा के संग्रहण के लिए 250 से अधिक उत्पादक समूहों का गठन किया जा चुका है. नीरा के संग्रहण के बाद इसके एक हिस्से का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर बिक्री के लिए किया जाएगा. वहीँ दूसरे हिस्से का इस्तेमाल गुड़ बनाने के लिए किया जाएगा.

सरकार की योजना है कि नीरा को स्थानीय स्तर पर बेचने और गुड़ बनाने की ओर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाएगा. इसके साथ-साथ नितीश सरकार बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक परिसंघ (कंफेड) के जरिए हाजीपुर, नालंदा, भागलपुर और गया में प्रसंस्करण संयंत्र भी लगा रही है. हाजीपुर, गया और नालंदा में नीरा प्रसंस्करण और गुड़ बनाया जाएगा. वहीँ भागलपुर में सिर्फ गुड़ ही बनाया जाएगा.

सरकार के मुताबिक़ यदि नीरा उत्पादक चाहें तो वो खुद भी नीरा की बिक्री या गुड़ बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले उन्हें राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से प्रशिक्षण लेना होगा. अगले कुछ महीनो के अंदर-अंदर सुधा डेयरी की दुकानों से ‘नीरा’ और ताड़ के हलवे, मिठाई, गुड़ और अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी जायेगी.

करना होगा मद्य निषेध कानून का पालन !

सरकार के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ़ एस़ सिद्धार्थ के मुताबिक़ सरकार की योजना ऐसे लोगों को लाइसेंस देने की है, जो ताड़ के पेड़ पर चढ़कर दिखा सकें. इसका लाइसेंस लेने के लिए आवेदकों को जिला उत्पाद अधीक्षक को आवेदन देना होगा. जिस किसान के ताड़ के पेड़ों से नीरा निकालने के लिए आवेदन किया जा रहा है, पहले उस किसान की सहमति भी लेनी होगी. आवेदन के साथ-साथ यह संकल्प पत्र भी भरना होगा कि हर हाल में आवेदक बिहार के मद्य निषेध कानून 2016 का पालन करेगा.

संकल्प पत्र भरने के बाद भी समय-समय पर जांच की जायेगी और यदि शिकायत मिली कि नीरा निकालने का लाइसेंस लेकर ताड़ी बनाई जा रही है तो इसके खिलाफ मद्य निषेध कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जायेगी. नीरा निकालने के बाद ऐसे ही किसी को भी नीरा उपलब्ध नहीं किया जा सकता, केवल सरकार द्वारा निश्चित की गयी एजेंसियों को ही नीरा उपलब्ध कराया जा सकता है या किसान खुद उससे गुड़ अथवा अन्य उत्पाद बना सकता है.


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