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निर्मला सीतारमण ने सेना के लिए शुरू किया 12 अरब डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, पाक-चीन में मची खलबली

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नई दिल्ली : निर्मल सीतारमण को देश का रक्षामंत्री बने अभी ज्यादा वक़्त नहीं हुआ है, लेकिन थोड़े ही वक़्त में उन्होंने दिखा दिया है कि वो कितनी सक्रिय और तेज-तर्रार हैं. वो सेना के ठिकानों पर जा-जा कर रक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं. उन्होंने एक नयी पहल की है, जिसके तहत वो रक्षा खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नियमित रूप से सशस्त्र बलों के प्रमुखों से मिलती हैं. अब उन्होंने अपना पहला सबसे बड़ा कदम उठाया है, जिसने देश के दुश्मनों को हिला कर रख दिया है.


भारत का नई कॉम्बैट वेहिकल प्रोजेक्ट शुरू

युद्धक्षेत्र में मिकेनाइज्ड दस्तों को आगे ले जाने वाली बख्तरबंद गाड़ियाँ अब बेहद महत्वपूर्ण हो गईं हैं. भारत के पास रूस मूल के एमपीवी-1 और एमपीवी-2 वाहन हैं. भारत ने एमपीवी-2 के अपग्रेड की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है, ताकि ये रात में भी काम कर सकें और नवीनतम एंटी-टैंक मिसाइलों से लैस हो सकें.

एक दशक से अटका था प्रोजेक्ट

एक दशक से अधिक समय से भारतीय सेना के लिए 2300 फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बोट वाहन (एफआईसीवी) की खरीद के लिए 12 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट अटका हुआ था. पिछली सरकार ने इस प्रोजेक्ट को लगभग 10 वर्षों तक लटकाये रखा, लेकिन अब निर्मला सीतारमण ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया है.

2015 में एलएंडटी, टाटा मोटर्स, रिलायंस, महिंद्रा और टाटा पावर एसईडी-टीटागढ़ वैगंस के अलावा सरकारी आयुध फैक्ट्री बोर्ड ने भी प्रोजेक्ट में अपनी दिलचस्पी दिखाई थी. ये प्रोजेक्ट सरकारी आयुध फैक्ट्री बोर्ड को दे दिया गया है.


अमेरिका के अलावा रूस भी उत्सुक

बताया जा रहा है कि निर्मला सीतारमण ने इस प्रोजेक्ट से जुडी जानकारियां मांगी हैं. इसके बाद अब 26 सितम्बर को यह मामला रक्षा खरीद बोर्ड के सामने आएगा. खबर है कि निर्मला सीतारमण आने वाले दिनों में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटीज से मिलने पर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने जा रही हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका के साथ-साथ रूस भी इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी उत्सुकता जाहिर कर चुका है.

ये डील भारतीय सेना के नवीनीकरण के लिए काफी महत्वपूर्ण है और इसीलिए निर्मला सीतारमण इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध नज़र आ रही हैं. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पॉलिसी (एसपीपी) के तहत इस समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

3,000-4,000 करोड़ रुपये की आएगी लागत

रक्षा खरीद परिषद की इस महीने के अंत में होने वाली बैठक में इस सिलसिले में फैसला हो जाएगा. इस सिलसिले में इसके पहले एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया था. यह ईओआई रक्षा खरीद नीति-2008 के तहत जारी किया गया था. इसपर 3,000-4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस राशि में से 80 प्रतिशत सरकार देगी. प्रोटोटाइप बनने के बाद सेना उनका परीक्षण करेगी.


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