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दिल्ली से लेकर कश्मीर तक जांच एजेंसियों की हाहाकारी कार्रवाई, अलगाववाद और अलगाववादी सब ख़त्म

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नई दिल्ली : कश्मीर समस्या का समाधान अब हो ही गया समझिये. पीएम मोदी ने अपना वादा निभाते हुए कश्मीर समस्या का समाधान आखिर कर ही दिया है. इसमें उन्हें सबसे बड़ा सहयोग मिला है आजतक/इंडिया टुडे की ओर से. अभी-अभी आयी खबर इतनी महत्वपूर्ण है, जिसे देख पाकिस्तान के हाथ-पाँव फूल गए हैं.

अलगाववादियों के 21 ठिकानों पर एनआईए के छापे

खबर है कि कश्मीर में आतंकियों की फंडिंग के लेकर अलगाववादी नेताओं के साथ पूछताछ के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली और कश्मीर में ताबड़तोड़ छापे मारे हैं. बताया जा रहा है कि एनआईए के डंडे के आगे अलगाववादी नेताओं ने अपने सारे देशविरोधी राज खोल दिए हैं और उनके द्वारा मिली जानकारियों के आधार पर एनआईए ने कश्मीर में अलगाववादियों के 14 और दिल्ली में 7 ठिकानों पर छापेमारी की है.

एनआईए ने अबतक छापेमारी के दौरान दिल्ली और श्रीनगर से सवा करोड़ रुपए की रकम बरामद की गई है, जिसका प्रयोग कश्मीर में आतंक फैलाने, आगजनी और पत्थरबाजों की फंडिंग के लिए होना था. एनआईए ने हुर्रियत के नईम खान, बिट्टा कराटे, जावेद गाजी बाबा के ठिकानों पर छापेमारी की हैं. इसी के साथ अब प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को बदलते हुए इन नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गयी है.

गिलानी-हाफिज सईद पर एफआईआर दर्ज

हवाला मामले और आतंकियों की फंडिंग मामले में एनआईए की टीमें दिल्ली के चांदनी चौक, बल्लीमारान सहित सात इलाकों में छापेमारी कर रही है. इसके अलावा कश्मीर के 14 इलाकों में भी एनआईए की छापेमारी चल रही है. सबसे अहम बात तो ये है कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. गिलानी ने पाकिस्तान से आतंकियों की फंडिंग के लिए पैसे मिलने की बात कबूलते हुए कई अहम खुलासे किये हैं, जिसके बाद एनआईए ने गिलानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है.

इसके अलावा एनआईए ने भारत में अशांति फैलाने की साजिश रचने के लिए पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद, हुर्रियत नेताओं और दुखतराने मिल्लत पर भी एफआईआर दर्ज की है. अलगाववादी नेताओं ने जांच एजेंसियों के सामने कबूल किया कि सबसे पहले पैसा पाकिस्तान से सऊदी अरब और फिर वहां से बांग्लादेश होते हुए श्रीलंका के हवाला ऑपरेटर के पास पहुंचाया जाता है. फिर श्रीलंका के हवाला ऑपरेटर इस पैसे को दिल्ली के हवाला ऑपरेटर के पास पहुंचाते हैं, जिसके बाद ये पैसा दिल्ली, हरियाणा के कुछ व्यापारियों की मदद से कश्मीर में अलगाववादियों तक पहुंचाया जाता है.


एनआईए के पास पुख्ता सबूत

यही पैसा पत्थरबाजों में बांटा जाता है और उन्हें जवानों पर पत्थर फेकने के लिए उकसाया जाता है. एनआईए हवाला में शामिल इन व्यापारियों की पहचान कर चुकी है और अगले कुछ ही दिनों में ये सब हवालात में दिखाई देंगे.

एनआईए की पूछताछ के दौरान अलगाववादी नेता फारूक अहमद डार उर्फ ‘बिट्टा कराटे’, जावेद अहमद बाबा उर्फ ‘गाजी’ और नईम खान ने खुलासे किये कि इस सारी समस्या की जड़ पाकिस्तान और कश्मीर में बैठा गिलानी है. गिलानी को अलगाववाद फैलाने के लिए नियमित रूप से पैसे मिलते थे और ये पैसा पाकिस्तान से हवाला और क्रॉस बॉर्डर ट्रेड के जरिये भारत आता है.

बताया जा रहा है कि एनआईए को इस बार बेहद पुख्ता सबूत मिले हैं और अब इन अलगाववादी नेताओं का बचना नामुमकिन है, देश के साथ द्रोह करने, आतंक फैलाने और अन्य कई अपराधों के चलते इनकी बाकी जिंदगी जेल में ही कटेगी. इसी के साथ कश्मीर को तोड़ने का पाकिस्तान का मंसूबा भी पूरी तरह से फेल हो गया है.

क्या था ऑपरेशन हुर्रियत?

दरअसल आजतक/इंडिया टुडे के स्टिंग ‘ऑपरेशन हुर्रियत’ में अलगाववादी नेताओं द्वारा खुफिया कमरे के सामने ये कबूल किया था कि अलगाववादी नेता पाकिस्तान से पैसे लेकर घाटी में आतंक का नंगा नाच करवाते हैं. स्कॉलों व् सरकारी इमारतों को आग के हवाले करते हैं. सब कुछ सिर्फ पैसे की खातिर.

हुर्रियत के गिलानी धड़े के प्रांतीय अध्यक्ष नईम खान ने खुफिया कमरे के सामने कबूल किया था कि, ‘पाकिस्तान पिछले 6 साल से कश्मीर में बड़ा प्रदर्शन खड़ा करने के लिए हाथ-पैर मार रहा है.’ कश्मीर को हिंसा की आग में झोंकने के लिए पाकिस्तान कितना पैसा भेज रहा है, इस पर नईम खान ने बताया था कि, ‘पाकिस्तान से आने वाला पैसा सैकड़ों करोड़ से ज्यादा है, लेकिन अलगाववादी और ज्यादा की उम्मीद करते हैं.’ इसके बाद केंद्र सरकार ने एनआईए को इसकी जांच सौंप दी.


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